बागेश्वर डायट में आयोजित कार्यक्रम में वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा को सम्मानित करते आयोजक। विज्
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बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में आजादी का अमृत महोत्सव और हिंदी पखवाड़े के तहत स्वाधीनता संग्राम में हिंदी पर विचार गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन हुआ। भाषा उत्कृष्टता केंद्र की ओर से आयोजित संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक भाषा नहीं बल्कि एक योद्धा के रूप में भूमिका निभाई है।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. शैलेंद्र धपोला ने कहा कि हिंदी ने स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया। कार्यक्रम संचालक डॉ. केएस रावत ने कहा कि हिंदी ने सभी दिशाओं को एक साथ जोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन को एक सूत्र में बांधा। डॉ. केएन कांडपाल, डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी, डॉ. जितेंद्र तिवारी, डॉ. राजीव जोशी, दीप पांडे, वृक्ष प्रेमी किशन सिंह मलड़ा, डॉ. पीएम मावड़ी ने भी संगोष्ठी में विचार रखे।
द्वितीय सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन में डॉ. केएस रावत ने फरमाया, जाने का पता न था आने की आहट न थी, वक्त की बात क्या मौसम की चाहत न थी। विनोद प्रकाश ने पहाड़ों का एक अलग आसमान एक अलग धरती होती है। डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने हिंदी है ये भाषा जननी, चित्त विकास अमंगल हरनी आदि स्वरचित कविताएं सुनाईं। वहां पर डॉ. दया सागर, डॉ. बीडी पांडे, रवि जोशी, केपी चंदोला, भजन सिंह, जगदीश, दिनेश कुमार, रामनरेश आदि थे। संचालन डॉ. राजीव जोशी, अध्यक्षता दीप पांडे ने की।