बागेश्वर। महिला सशक्तीकरण के दौर में महिलाएं आज हर कार्यक्षेत्र में अपना लोहा मनवा रहीं हैं। महिलाएं अपने अधिकारों को लेकर जागरूक हो रही हैं। वक्त के इस बदलाव में शिक्षा का अहम योगदान रहा है। हालांकि पुराने समय में शिक्षा का इतना प्रचार-प्रसार नहीं था। कई महिलाएं स्कूलों तक नहीं पहुंच पाती थीं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी उम्र में लड़कियों की शादी कर दी जाती थी। उस दौर में महिलाएं घर के कामकाज तक ही सीमित रहतीं थी। ऐसे में कई महिलाएं मतदान तक नहीं कर पातीं थी। रीठाबमन गांव की 79 वर्षीय सुबुली देवी ने अपने जीवनकाल में देखे चुनाव और महिलाओं के जीवन में हुए बदलाव साझा किए।
सुबुली देवी का विवाह 11 वर्ष की उम्र में हो गया था। वह कहतीं हैं कि उस दौर में महिलाओं का जीवन खेतीबाड़ी और पशुपालन के इर्द-गिर्द सीमित था। हालांकि उनका परिवार समृद्ध और समाज के प्रति जिम्मेदारियों को समझने वाला था। जिसके कारण बालिग होने के बाद उन्होंने भी परिवार के सदस्यों के साथ मतदान किया था। उन्हें अपने पहले मतदान की सही से याद तो नहीं है, लेकिन जब भी चुनाव होते थे, वह अपने गांव से करीब तीन किमी दूर सिमखेत में बने बूथ में मतदान करने जातीं थीं। सुबुली देवी कहतीं हैं कि आज का दौर बहुत अच्छा है।
लड़कियां पढ़-लिख रहीं हैं और समाज के हर क्षेत्र में अपना मुकाम बना रहीं हैं। उस दौर में महिलाओं को घर-परिवार की देखभाल से ही फुर्सत नहीं मिलतीं थी। राजनीति और चुनाव से कई महिलाओं का सरोकार नहीं रहता था। कुछ महिलाएं मतदान तो करतीं थी, लेकिन परिवार के सयाने लोगों से राय लेकर वोट डालतीं थीं। आजकल के समय में हर कोई अपने पसंद से मतदान करता है। लोग अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं। उन्होंने कहा कि इस बार के चुनाव में भी वह अपना वोट करेंगी। वह अपने पुत्र की सहायता से मतदान बूथ जाएंगी और क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए कार्य करने वाले के पक्ष में मतदान करेंगी।