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बागेश्वर में उत्तरायणी मेला

Sat, 16 Jan 2016 12:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
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जिले में मकर संक्रांति श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। यहां सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम पर स्नान करने वालों का सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हर हर महादेव के जयघोष के साथ संगम पर डुबकी लगाई। सूर्य को अर्घ्य देने के बाद उन्होंने पौराणिक बागनाथ, कालभैरव नाथ और बाणेश्वर समेत अन्य मंदिरों पूजा अर्चना की। उन्होंने तीर्थ पुरोहितों से रूद्री पाठ कराकर पुण्य अर्जित किया।
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मकर संक्रांति के पर्व पर शुक्रवार को देवालय श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे। सरयू, गोमती और विलुप्त सरस्वती के संगम पर स्नानार्थियों का ब्रह्ममुहूर्त से ही तांता लग गया। श्रद्धालुओं ने फूल और अक्षतों से सरयू की पूजा की। इसके बाद वह पवित्र जल को तांबे के लोटों में भरकर भगवान बागनाथ मंदिर पहुंचे।

 वहां उन्होंने ऊं नम: शिवाय के महामंत्र से बागनाथ को जलार्पण कर मिष्ठान और फल अर्पित किए। मंदिर में रूद्री पाठ किया। कालभैरव नाथ और बाणेश्वर मंदिर में उड़द की दाल और चावल अर्पित किया। बागनाथ मंदिर में पूजा कराने वाले पंडित हेम चंद्र जोशी ने बताया कि इस बार सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश 15 जनवरी की सुबह साढ़े तीन बजे से चार बजे के बीच कर लिया था।
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 इसके बाद स्नान भी शुरू हो गया था।  उधर कपकोट के शिव मंदिरों, तप्तुकुंड और भद्रतुंग, कांडा के बद्रीनाथ धाम, गोपेश्वर महादेव और पचार के मोहली स्थित एक हथिया महादेव मंदिर में जलार्पण करने वालों की सुबह से ही भीड़ लगी रही।  

 शुक्रवार माघ पर्व शुरू होते ही संगम और सूरजकुंड में बच्चों के चूड़ाकर्म और जनेऊ संस्कार कराने वालों का ब्रह्ममुर्हूत से ही आना शुरू हो गया।। पंडितों ने पूरे विधि विधान से तिल और गाय के घी से हवन कराकर बच्चों को जनेऊ धारण करवाया और पंडितों ने बटुकों को गायत्री मंत्र दिए। अनेकों ने श्राद्ध तर्पण किया।   

शुक्रवार सरयू वार के हिस्सों में घुघुतिया त्यार धूमधाम से मनाया गया। बच्चों ने मीठे आटे से बने घुघुतों की माला गले में पहनी थी। बच्चों ने कौव्वों को अपने पास बुलाया और उन्हें घुघुते खिलाए। यह त्योहार सरयू पार के कत्यूर घाटी और खरेही पट्टी आदि हिस्सों में 16 जनवरी को मनाया जाएगा। त्योहार को लेकर बच्चों में खासा उत्साह रहा।

 बागनाथ मंदिर के प्रवेश द्वार से पहले बाणेश्वर भगवान का मंदिर है। मान्यता है कि मंदिर की दीवार पर जो भी व्यक्ति पत्थर के टुकुड़े से अपनी मन्नत लिखता है। बाणेश्वर भगवान उसकी मुराद पूरी कर देते हैं। मन्नत पूरी होेने पर लोग मंदिर में चावल, उड़द की दाल, फल, मिष्ठान और घंटियां चढ़ाते हैं।

 मकर संक्रांति के पर्व के मौके पर सरयू और गोेमती के संगम पर अखिल भारतीय विद्यार्थी के कार्यकर्ताओं ने खिचड़ी का आयोजन किया था। मेलार्थियों ने देव मंदिरों में पूजा अर्चना के बाद खिचड़ी का लुत्फ उठाया।

भगवान बागनाथ की नगरी में उत्तरायणी मेले की दिन-रात धूम मची हुई है। बृहस्पतिवार की नाइट कल्पना चौहान एंड पार्टी के नाम रही। मेलार्थियों ने कल्पना चौहान के गीत घास कांटूला इजू ऊंचा नीचा डाना... पर खूब ठुमके लगाए।

ऐतिहासिक नुमाइशखेत मैदान स्थित रामलीला भवन में कल्पना चौहान की टीम ने अपने कार्यक्रमों की शुरुआत म्यार बागनाथ देवा तुमि दैणा है जाया...भजन गाकर की। कलाकार रोहित चौहान ने हीरा वे चेली नारूली..., गोपाल मठपाल ने बागश्यर बजारा उत्तरैणी म्याल लागि रे हिट उत्तरैणी कौति जानूं... मनभावन गीत गाए।

स्थानीय कलाकारों ने रानीखेता राम ढोल तू बजाल घम घम...समेत कई मनमोहक गीत गाकर मेलार्थियों को मस्त कर दिया। देर रात तक मेलार्थियों ने चांचरी के गीतों का गायन किया। एंजल एकेडमी स्कूल कपकोट के बच्चों अर्चना, एंजल, अंजलि, दीप, वंदना और कोमल ने मनमोहक घुघुति डांस पेशकर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। बाल कलाकारों ने विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल को घुघुतों की माला पेश की।    

 एजूकेशनली ब्लैस्ड इंडिया रूरल डेवलपमेंट सोसायटी के सांस्कृतिक दल ने सरयू बगड़ में स्वच्छ भारत अभियान में जागरूकता कार्यक्रम चलाया। कार्यकर्ताओं ने मोमबत्तियों के जरिए स्वच्छ भारत की ज्योति जलाई।

उन्होंने बगड़ में फड़ लगाकर व्यापार करने आए लोगों को मेले के दौरान स्वच्छता बनाए रखने में नगर पालिका परिषद को पूरा सहयोग देने की अपील की। दल ने नुक्कड़ नाटक और प्रेरणादायक गीतों का गायन भी किया। कार्यक्रम का संचालन भावना तिवाड़ी ने किया। वहां नवीन रावल, महेश खेतवाल, दीप जोशी, गौरव टाकुली, गौरव कुमार, दीपक खेतवाल आदि थे।
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