बागेश्वर। पंडित बीडी पांडे कैंपस के बाद अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय कपकोट में भी छात्रसंघ चुनाव को लेकर विवाद गहरा गया है। विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद के नामांकन पत्रों की बिक्री में धांधली और रिकॉर्ड में अंतर का आरोप लगाते हुए अभाविप कार्यकर्ताओं ने शनिवार को कॉलेज परिसर में जोरदार हंगामा और नारेबाजी की। स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि पुलिस और तहसील प्रशासन को मौके पर मोर्चा संभालना पड़ा। मामला विश्वविद्यालय प्रतिनिधि पद के फॉर्मों की संख्या को लेकर है। छात्र नेताओं का कहना है कि प्रत्याशी नेहा गड़िया ने दो फॉर्म खरीदे थे जबकि एक अन्य फॉर्म सपना आर्या ने खरीदा था। इस तरह कुल तीन फॉर्म बिके लेकिन कॉलेज प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड में केवल दो ही फॉर्मों की बिक्री दर्ज है। तीसरा फॉर्म कहां से आया और जांच सूची में प्रत्याशी का नाम कैसे शामिल हुआ, इसी सवाल को लेकर छात्र आंदोलन पर उतर आए हैं। शनिवार शाम करीब चार बजे नामांकन पत्रों की जांच के बाद कॉलेज प्रशासन ने वैध प्रत्याशियों की सूची सूचना पट्ट पर चस्पा कर दी। सूची देखते ही छात्र भड़क गए। इसके बाद कॉलेज स्टाफ ने खुद को एक कमरे में बंद कर अंदर से ताला लगा लिया। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मुकुल शाही और अभाविप चुनाव प्रभारी प्रकाश चंद्र के नेतृत्व में उग्र छात्रों ने बाहर से भी ताला लगाने का प्रयास किया और नारेबाजी शुरू कर दी।
भीषण नारेबाजी और तनावपूर्ण माहौल के बीच कमरे के अंदर बंद एक महिला प्राध्यापक को घबराहट होने लगी और उनकी तबीयत बिगड़ गई। मामला बिगड़ता देख प्राचार्य डॉ. मधुलिका पाठक ने तुरंत डीएम और पुलिस प्रशासन को सूचना दी। पुलिस ने आपातकालीन सेवा 112 के जरिये बीमार प्राध्यापक को सुरक्षित उनके घर पहुंचाया। सूचना पर थाना प्रभारी प्रताप सिंह नगरकोटी और तहसीलदार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और उग्र छात्रों को समझाने का प्रयास किया। देर रात तक पुलिस और तहसील प्रशासन की मौजूदगी में आंदोलित छात्रों और कॉलेज प्रशासन के बीच वार्ता चलती रही।
डिग्री कॉलेज कपकोट की प्राचार्य, डॉ. मधुलिका पाठक ने बताया कि आंदोलित छात्रों के साथ कॉलेज प्रशासन की वार्ता चल रही है। बातचीत के माध्यम से ही समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा। फॉर्म बिक्री को लेकर जो भी भ्रम या संशय बना हुआ है, उसे पारदर्शी तरीके से दूर कर दिया जाएगा।