धरमघर (बागेश्वर)। चाय बागान धरमघर में चाय विकास बोर्ड और काश्तकारों के बीच तीखी बहस हुई। चाय बागान संघर्ष समिति की ओर से आयोजित खुली बैठक में भूमिधरों ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गहरा अविश्वास जताया। काश्तकारों का कहना है कि विभाग ने उनकी अनुपस्थिति में पौधों की गिनती कर रोजगार के दिन तय किए हैं जो उन्हें कतई मंजूर नहीं है। उन्होंने पौधों की गिनती दोबारा कराने की मांग की।
रविवार को चाय बागान धरमघर में आयोजित बैठक में काश्तकारों ने कहा कि बिना किसी शासनादेश के धरमघर क्षेत्र से कार्यालय को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष और सरपंच संगठन के जिलाध्यक्ष धीरज सिंह मेहरा ने कहा कि यदि जल्द कार्यालय को धरमघर में नहीं खोला गया तो काश्तकार सांकेतिक धरने के साथ उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। बैठक में सिमगड़ी चाय बागान को पर्यटन से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा गया। काश्तकारों ने मांग की कि बागानों को पूर्व की भांति पूरी क्षमता से संचालित किया जाए। बेहतर उत्पादन के लिए काश्तकारों को प्रोत्साहित करने, समय पर खाद की आपूर्ति, तकनीकी यंत्र उपलब्ध कराने और नियमित प्रशिक्षण देने की मांग उठाई गई। इस मौके पर उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के सहायक प्रबंधक केसर सिंह गंगोला ने बोर्ड का पक्ष रखा और सुझावों को सुना। इस मौके ग्राम प्रधान लमजिगड़ा दीपा देवी, प्रधान महरूड़ी फकुती देवी, प्रधान चुचेर दीपा देवी, सरपंच हयात सिंह, दीवान सिंह, त्रिलोक सिंह, हेमा देवी, पुष्पा देवी, बलवंत सिंह मौजूद रहे। बोर्ड की ओर से हरीश शानी, शोबन राम, कृष्णा बचखेती और बलादत्त जोशी मौजूद रहे।