बागेश्वर। नगर में ऐतिहासिक उत्तरायणी मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। रंग-रोगन के साथ ही घाटों को सजाने-संवारने का काम जारी है। मेले के दौरान व्यापारियों के लिए सरयू तट पर दुकानों का आवंटन करने के लिए मार्किंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नदियों पर आवाजाही के लिए अस्थाई लकड़ी के पुल बनाएं जा रहे हैं।
उत्तरायणी मेले को भव्य रूप देने के लिए नगर पालिका की टीम जुटी हुई है। पिछले वर्ष की तरह इस बार भी दीवारों पर बागेश्वर के पौराणिक महत्व और कुमाऊंनी संस्कृति को दर्शाती आकर्षक पेंटिंग्स बनाई जा रही हैं। बागनाथ मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर नुमाइशखेत मेला स्थल तक की दीवारों को नया रूप दिया जा रहा है। व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मेले के लिए सरयू तट पर 93 दुकानों के लिए जगह चिह्नित कर मार्किंग की गई है।
मेले के दौरान रोशनी की उचित व्यवस्था के लिए घाटों के किनारे खराब हुई लाइटों की मरम्मत की जा रही हैं। गोमती और सरयू नदी के संगम पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए लकड़ी के अस्थायी पुलों का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया है। नगर के स्थायी पुलों में रंग रोगन कर उन्हें सजाया जा रहा है।
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उत्तरायणी मेले से पहले सरयू और गोमती घाटों को सजाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। घाट किनारे की दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग्स बनाने का कार्य तेजी से चल रहा है। मेले से पहले नगर को भव्य रूप से सजाया जाएगा। - सुरेश खेतवाल, पालिकाध्यक्ष बागेश्वर