बारिश नहीं होने से वातावरण में धुंध छाने लगी है। वनों में लग रही आग से हालात और भी खराब हो रहे हैं। यह धुंध जहां एक ओर प्राकृतिक सौंदर्य को नजरों से ओझल कर रही है वहीं इससे स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां होने की संभावनाएं भी बढ़ने लगी हैं।
इस साल बारिश नहीं होने से फरवरी माह से ही वातावरण में धुंध छाने लगी है। वनों में लग रही आग इसमें और अधिक इजाफा कर रही है। अभी फायर सीजन शुरू नहीं हुआ है लेकिन जनपद के वन आग की चपेट में आने लगे हैं। इससे स्थिति बिगड़ती जा रही है।
हालात यह हैं कि दिन के समय धुंध के कारण विजीबिलिटी कम हो रही होगी। धुंध के कारण हिमालय तक नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटक भी मायूस हैं। इतना ही नहीं धुंध के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
दमा और श्वांस के रोगियों की परेशानी बढ़ रही है। लोगों को आंखों में जलन की शिकायत भी आ रही है। यदि अगले कुछ दिनों तक बारिश नहीं हुई तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
रसायन विज्ञान के प्राध्यापक डॉ. विपिन जोशी बताते हैं कि धुंध मुख्य रूप से कार्बन और धूल के कण होते हैं, जो हवा में तैरते रहते हैं।
वातावरण में इन कणों की अधिकता होने पर स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां बढ़ने लगती हैं। कार्बन के पार्टिकल श्वांस और दमा के रोगियों के लिए अधिक हानिकारक हैं। बारिश होने के बाद ही धुंध की समस्या समाप्त हो सकती है।