बागेश्वर में हरसिला-नान कनियालीकोट सड़क पर आया बोल्डर।
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आपदा की मार से दो और मकान ढह गए। जबकि 11 और मकान क्षतिग्रस्त हो गए। दूसरी ओर सात सड़कें बंद रहीं। इन सड़कों पर यातायात पूरी तरह ठप रहा। जबकि सात सड़कों पर आए मलबे से यातायात घंटों बाधित रहा। सड़कें बंद होने से हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित रहा।
बुधवार भारी बारिश के चलते कांडा तहसील के संक्यूड़ा गांव में नवीन राम और रमेश राम का आवासीय मकान ढह गया। इसके साथ ही प्रभावितों का राशन, बर्तन, कपड़े आदि घरेलू सामान मलबे में दब गया। प्रभावितों ने आपदा राहत शिविर में शरण ली। तहसील के सिमकुना गांव में मथुरा राम का मकान को हल्का नुकसान पहुंचा। बागेश्वर तहसील के धारी गांव में कमला देवी का मकान क्षतिग्रस्त हो गया। काफलीगैर तहसील के झिरौली गांव में भूपाल राम जबकि करासीबूंगा के पूरन राम का मकान क्षतिग्रस्त हो गया। कपकोट तहसील के पौसारी गांव में मनोज कुमार के मकान को हल्ला नुकसान हुआ। जबकि रमाड़ी गांव में आन सिंह का आवासीय मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। माजखेत गांव में भी जोगा राम के मकान को भारी नुकसान हुआ। पोलिंग गांव में आनंद राम और जगदीश राम के मकान को भारी नुकसान हुआ। सीमा में किशन सिंह के मकान को हल्का नुकसान पहुंचा। गरुड़ तहसील के लेटी गांव में प्रकाश राम के मकान को हल्का नुकसान हुआ। राजस्व कर्मियों ने मौका मुआयने के साथ आपदा से हुए नुकसान का आकलन किया।
दूसरी ओर भूस्खलन और मलबा आने से बृहस्पतिवार को दिनभर सात सड़कें बंद रहीं। इन मार्गों पर यातायात पर निर्भर 15 हजार से अधिक लोग खासे परेशान रहे। जरूरी हालातों में ग्रामीणों को कई किमी पैदल दूरी भी नापनी पड़ी। इसके अलावा नौ सड़कों पर आए मलबे से यातायात बाधित रहा। कार्यदायी संस्था के मार्ग खोलने से पहले सैकड़ों यात्री वाहनों में फंसे रहे।