कमस्यारघाटी के बच्चों के लिए खेल स्टेडियम भी नसीब नहीं है। खेल मैदान न होने के कारण क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं जबकि इसके लिए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पीएस डसीला स्मारक राइंका देवतोली का खेल मैदान मुफीद है। गुस्साए लोगोें ने मैदान को स्टेडियम बनाने की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है।
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार कांडा तहसील के कमस्यारघाटी की आबादी 20 हजार से भी अधिक है। इस क्षेत्र में 18 से अधिक प्राइमरी, जूनियर, माध्यमिक स्कूल हैं। सरकारी उपेक्षा के कारण क्षेत्र में एक अदद भी खेल स्टेडियम नहीं है। ढंग का खेल मैदान न होने के कारण बच्चों को खेतों में खेलना पड़ रहा है।
क्षेत्र में की खेल प्रतिभाएं प्रांतीय प्रतियोगिताओं में पिछड़ रहे हैं। लोगों को आशा थी कि सरकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पीएस डसीला स्मारक राइंका देवतोली के मैदान को स्टेडियम का रूप दे देगी लेकिन पृथक राज्य बनने के 14 साल बाद भी यह मैदान उपेक्षित है।
सुरक्षा दीवार न होने के कारण मैदान के किनारे टूटते जा रहे हैं जबकि कुछ लोग अतिक्रमण भी कर रहे हैं। बरसात में भूकटाव भी हो रहा है। जनवरी में जिला पंचायत की ओर से मैदान को समतल करने का प्रयास किया गया लेकिन विस्तार के लिए कुछ भी नहीं हुआ है।
हेलीकाप्टर चुनाव प्रचार आदि गतिविधियों के दौरान इसी मैदान में राजनेताओं के उतरते हैं लेकिन मैदान को स्टेडियम का रूप देने की कोई योजना नहीं बन सकी। क्षेत्र के लोगों ने शासन, प्रशासन से मैदान को स्टेडियम का रूप देने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
इनमें राइंका देवतोली अध्यापक अभिभावक संघ के अध्यक्ष मेहश राठौर, कमस्यार विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष सतीश उप्रेती, बीडीसी सदस्य कुंदन बोरा, अनिल रौतेला, बालीवाल खिलाड़ी सूरज कुमार दास, मनोज राठौर आदि शामिल हैं।