कविवर सुमित्रानंदन पंत की जयंती पर उनकी जन्म स्थली कौसानी में साहित्यकारों और कवियों ने उनका भावपूर्ण स्मरण किया। पद्मश्री रमेश चंद्र शाह ने कहा कि जब तक सूरज चांद रहेगा, तब तक पंतजी का साहित्य जिंदा रहेगा। उन्होंने हिंदी साहित्य के क्षेत्र में काम करने वालों से उनके मार्ग का अनुश्रवण करने को कहा।
पद्मश्री शाह भगवद्गीता केंद्र कौसानी, महादेवी वर्मा सृजन पीठ द्वारा दौलत सिंह मेहरा व्याख्यान कक्ष में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रकृति के सुकुमार पंत ने कौसानी में जन्म लेकर कौसानी का नाम देश-विदेश में रोशन किया। उन्होंने कहा कि पंत जी के आदर्शों का अनुश्रवण करना सभी साहित्यकारों की जरूरत है।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि साहित्यकार गोपाल दत्त भट्ट ने पंत जी की जीवनी पढ़ी। उन्होंने साहित्य प्रेमियों से पंत जी पर बारीकी से अध्ययन करने को कहा। कार्यक्रम के संयोजक डा. महेंद्र सिंह मेहरा मधु ने पंत जी के हिंदी साहित्य प्रेम पर व्याख्यान दिया। प्रो. देव सिंह पोखरिया ने कहा कि हमें पुराने कवियों से प्रेरणा लेनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि पंत जी ने प्रकृति पर जो कविताएं लिखीं, वह हमेशा के लिए यादगार रहेंगी। प्रो. शेर सिंह बिष्ट ने हिंदी साहित्य और पंत जी पर व्याख्यान दिया। वहां साहित्यकार देवकी मेहरा, यशपाल मेहरा, रमेश चंद्र मिश्रा, डा. विमल पंत, राजेंद्र रावत, लक्की पांडे, डा. हेम चंद्र दुबे, मोहन चंद्र जोशी, नवीन बिष्ट आदि ने व्याख्यान दिए।
सुमित्रानंदन पंत वीथिका में भी पंत जी को भावपूर्ण स्मरण हुआ। स्कूली बच्चों ने पंत जी के ने जीवन पर नाटक और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किये। पंत संग्रहालय में राजकीय संग्रहालय अल्मोड़ा के ज्ञानप्रकाश तिवारी की देखरेख में कार्यक्रम हुए। कवियों ने स्वरचित कविता पढ़ी।
पंत जयंती पर भगवद्गीता केंद्र कौसानी के दौलत सिंह मेहरा व्याख्यान कक्ष में कवि गोष्ठी हुई। कवियों ने हिंदी, कुमाऊंनी में कविता पाठ किया।
कवि गोष्ठी में प्रो. देव सिंह पोखरिया, प्रो. शेर सिंह बिष्ट, मधु मेहरा, बच्ची गिरी, संतोष तिवारी, डा. हेम दुबे, देवकी मेहरा, गोपाल दत्त भट्ट, यशपाल मेहरा, लीलाधर पांडे, कला उपाध्याय आदि ने कविता पाठ किया। गोष्ठी का संचालन नवीन बिष्ट ने किया। गोष्ठी के अंत में कवियों ने शेरदा अनपढ़ का भावपूर्ण स्मरण किया।