बागेश्वर। जिले में वनाग्नि की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। जंगलों की आग से नगरीय और घाटी वाले इलाके धुएं की आगोश में हैं। सूरज की क्रांति भी फीकी पड़ने लगी है। अप्रैल के महीने में भी सुबह और शाम ठंड का अहसास होने लगा है।
पिछले वर्ष लॉकडाउन के चलते गर्मियों में जंगल सुरक्षित रहे थे। पर्यावरण प्रदूषण से भी लोग मुक्त थे। लॉकडाउन हटने के बाद अक्तूबर के महीने से जंगलों के जलने का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में पिछले छह महीने में वनाग्नि की 99 घटनाएं हो चुकी हैं। इससे 30 पिछले वर्ष की और जनवरी से अब तक 69 घटनाएं हो चुकी हैं। इस दौरान 135 हेक्टेयर वन भूमि आग की चपेट में आई और करीब चार लाख रुपये का नुकसान हुआ है। पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ रहे वनाग्नि के मामलों से जिला मुख्यालय, गरुड़ घाटी, दुग नाकुरी आदि क्षेत्रों में धुआं फैल गया है। इसके कारण लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला मुख्यालय सहित दुग नाकुरी के जंगल धधके
बागेश्वर। पिछले एक सप्ताह में जिला मुख्यालय के आरे, कुकुड़माई, नदीगांव के जंगलों में आग लगी तो कांडा और दुग नाकुरी तहसील के जंगल भी धधकते रहे। धरमघर रेंज के अधिकांश जंगल आग से नष्ट हो चुके हैं। काफलीगैर और गरुड़ तहसील के जंगलों में भी आग से काफी नुकसान पहुंचाया है। (संवाद)
बीमारियों में हो रहा इजाफा
बागेश्वर। वनाग्नि के धुएं से बीमारियों में बढ़ोतरी हो गई है। सीएसएम डॉ. सीपी त्रिपाठी ने बताया कि अस्पतालों में एलर्जी, सांस लेने में परेशानी, दमा, आंख में जलन और दर्द की शिकायत लेकर मरीज पहुंच रहे हैं। कोरोना में फेफड़ों के संक्रमण वालों के लिए भी धुएं से अधिक परेशानी हो रही है। उन्होंने लोगों से प्रदूषण को देखते हुए जरूरी कार्य होने पर ही घरों से बाहर निकलने को कहा। बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों का विशेष ध्यान रखने और किसी तरह की परेशानी होने पर तत्काल अस्पताल आकर जांच कराने की भी अपील की। (संवाद)
वन विभाग ने बढ़ाई फायर वॉचरों की संख्या
बागेश्वर। वनाग्नि की घटनाओं में इजाफा होने के बाद वन विभाग की सक्रियता भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार धधक रहे जंगलों की आग पर काबू पाने के लिए वन विभाग ने सभी क्रू स्टेशनों में फायर वॉचरों की संख्या बढ़ा दी है। वन पंचायत सरपंचों और ग्रामीणों का भी आग बुझाने में सहयोग लिया जा रहा है। वनों को आग के हवाले करने वाले अराजक तत्वों पर भी नजर रखी जा रही है। (संवाद)
कोट
वनाग्नि से जंगलों को बचाने के लिए जिले में 29 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। पहले प्रत्येक क्रू स्टेशन में चार फायर वॉचर थे, जिनकी संख्या बढ़ाकर छह कर दी गई है। वन विभाग के कर्मचारी और फायर वॉचर मिलकर वनाग्नि को रोकने का भरसक प्रयास कर रहे हैं।
-बीएस शाही, डीएफओ बागेश्वर।