बागेश्वर के सुमगढ़ में मासूमों को श्रद्धांजलि देते लोग। विज्ञप्ति
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बागेश्वर। 11 वर्ष पहले के सुमगढ़ के हृदयविदारक घटना की याद आती ही आज भी दिल दहल उठता है। ठीक 11 वर्ष पहले सुमगढ़ में भूस्खलन की चपेट में आने से सरस्वती शिशु मंदिर के 18 मासूम काल का ग्रास बन गए थे। सुमगढ़ हादसे की बरसी पर स्मारक में श्रद्धांजलि देने गए लोग हादसे को याद कर रो पड़े। जिला मुख्यालय में सुमगढ़ हादसे की याद में पौधरोपण किया गया।
18 अगस्त 2010 को सुमगढ़ के सरस्वती शिशु मंदिर में रोजाना की भांति पठन-पाठन हो रहा था। खराब मौसम के बीच जमीन दरकने से मलबा विद्यालय भवन में पट गया। विद्यालय के कक्षों में मौजूद 18 नौनिहाल मलबे में दफन हो गए। हादसे की याद में हर साल सुमगढ़ में बने स्मारक में लोग दिवंगत बच्चों को श्रद्धांजलि देते हैं।
बुधवार को भी स्मारक में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। लोगों ने दीया जलाकर पवित्र आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। बच्चों की याद में पौधरोपण किया गया। कार्यक्रम में पूर्व विधायक ललित फर्स्वाण, पूर्व जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी, चामू देवली, कमलेश गड़िया समेत तमाम लोग शामिल थे। विद्या भारती संस्था ने भी श्रद्धांजलि दी। इधर, जिला मुख्यालय के विकास भवन में वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा की अगुवाई में मृतक बच्चों की याद में पौधरोपण किया गया। श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष घनश्याम जोशी समेत तमाम लोग मौजूद थे।