बागेश्वर के चंडिका चोटी पर स्थापित प्रसार भारती का एफएम स्टेशन।
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करोड़ों की लागत से बना बागेश्वर एफएम स्टेशन श्रोताओं की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका है। एफएम स्टेशन की न तो क्षमता बढ़ी, और न ही चौबीस घंटे सुरीले तराने सुनाने के दावे ही पूरे हो सके। एफएम स्टेशन सायं पांच बजे शुरू होता है और रात 10.30 बजे बंद हो जाता है।
22 जनवरी 2016 को सूचना प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर व सांसद अजय टम्टा ने संयुक्त रूप से बागेश्वर एफएम स्टेशन का शुभारंभ किया था। एफएम स्टेशन की क्षमता बढ़ाने व 24 घंटे तराने बजाने का वादा किया गया था। जो कि चार साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। बागेश्वर का एफएम सेंटर सायं पांच बजे शुरू होता है तथा रात 10.30 बजे बंद हो जाता है। आकाशवाणी अल्मोड़ा से प्रसारित कार्यक्रम ही बागेश्वर स्टेशन से प्रसारित किए जा रहे हैं।
कुमाऊं का सबसे बड़ा ट्रांसमीटर
बागेश्वर में स्थापित एफएम स्टेशन कुमाऊं के सबसे अधिक क्षमता वाले एफएम स्टेशनों में से एक है। बागेश्वर में स्थापित एफएम स्टेशन पांच किलोवाट क्षमता का है। जबकि अन्य स्थानों पर स्थापित रिले सेंटरों की क्षमता इससे कम है। उसके बाद भी बागेश्वर के श्रोताओं को एफएम के सुरीले तराने सुनने को नहीं मिल रहे हैं। जिससे श्रोता निराश हैं। इधर श्रोताओं ने सेंटर से विविध भारती के कार्यक्रम अथवा 24 घंटे गाने शुरू करने की मांग की है।
स्टूडियो बनाने का काम भी अधूरा
एफएम रिले सेंटर में ही स्टूडियो बनाने का वादा भी पूरा नहीं हो सका है। स्टूडियो बनाने के बाद उम्मीद थी कि बागेश्वर के कलाकारों को स्थानीय स्तर पर मंच मिल सकेगा। लेकिन, स्टूडियो नहीं बनने से उनकी उम्मीदें भी धराशायी हुई हैं। हालांकि वर्तमान में सेंटर में स्टूडियो स्थापित किया गया है। लेकिन, इसके लिए उच्चस्तरीय उपकरण व पर्याप्त स्टाफ नहीं है। जिस कारण इसे शुरू नहीं किया जा रहा है।
= कोट
बागेश्वर एफएम स्टेशन में सायं पांच से रात 10.30 बजे तक अल्मोड़ा आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं। इसकी रेंज भी काफी कम है। तीन लोगों का तकनीकी स्टाफ कार्यरत है। स्टूडियो शुरू करने, क्षमता बढ़ाने अथवा विविध भारती के कार्यक्रम शुरू करने का काम प्रसार भारती के दिल्ली स्थित केंद्र के अधिकार क्षेत्र में है। - कैलाश गिरि, अभियांत्रिकी सहायक, एफएम स्टेशन बागेश्वर