बागेश्वर। उत्तरायणी मेले पर ओमिक्रॉन की मार पड़ने से नगर पालिका को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। मेले के भव्य आयोजन के लिए पालिका ने तैयारियां शुरू कर दी थी। नगर में रंग रोगन, सजावट, सफाई आदि कार्यों के लिए 38.76 लाख रुपये की निविदाएं निकाली जा चुकी हैं। अधिकांश कार्य शुरू भी हो गए हैं। हालांकि शेष कुछ कार्यों को पालिका रोकने का प्रयास कर रही है। इसके बावजूद मेला सीमित होने से पालिका को करीब 25 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कोरोना के कारण पिछले वर्ष भी मेला सीमित अवधि का हुआ था लेकिन इस वर्ष नगर पालिका ने मेले को भव्य बनाने की तैयारी की थी। मेले के भव्य आयोजन के लिए कई दौर की बैठक हो चुकी थी। पालिका ने नगर में पेंटिंग, सुधारीकरण, सफाई, मंदिर, पुलों की सजावट आदि की निविदाएं निकाल ली थी। इनमें से प्रमुख घाट, नालियों की सफाई, पुलिया निर्माण, रंग रोगन का काम इन दिनों चल रहा है। अन्य कार्यों की भी शुरुआत होनी थी। हालांकि ओमिक्रॉन की दस्तक के बाद अब मेला स्थानीय स्तर का ही रह गया है।
मेला सीमित होने से बाहरी व्यापारी, झूले-चर्खे, सर्कस आदि गतिविधियों का संचालन नहीं हो पाएगा। बाहरी कलाकार भी मेले में नहीं दिखेंगे। पालिका बाहरी व्यापारियों को मेले में जगह दिलाकर आय अर्जित करती थी, लेकिन मेला सीमित अवधि का होने से पालिका की ओर से कराए जा रहे कार्यों की लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। बाहरी व्यापारियों के स्थान पर स्थानीय व्यापारियों ने मेला स्थल में दुकानें सजाकर उचित दरों पर सामान उपलब्ध कराने की बात कही है, हालांकि इस पर भी संशय बना है।
व्यापारी बोले किराया कम होगा, तभी लेंगे दुकान
बागेश्वर। नगर पालिका को होने वाले नुकसान को कम करने के लिए स्थानीय व्यापारियों ने मेला स्थल में अपनी दुकानें लगाने की बात कही थी। हालांकि किराया अधिक होने की बात कहते हुए फिलहाल व्यापारियों के सुर भी बदले नजर आ रहे हैं। व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष हरीश सोनी का कहना है कि पालिका ने मेला अवधि कम होने के बावजूद दुकानों का किराया कम नहीं किया है, ऐसे में कई व्यापारी दुकान नहीं लगाएंगे। कहा कि अगर तीन दिन के किराए पर सहमति बनी तभी व्यापारी मेला स्थल पर पालिका से आवंटित स्थल पर अपनी दुकान लगाएंगे।
उत्तरायणी मेले के भव्य आयोजन की तैयारी चल रही थी, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण मेला सीमित करना पड़ा है। जिन निविदाओं पर अभी कार्य शुरू नहीं हुआ, उन्हें रोकने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि अधिकतर निविदाओं पर काम शुरू होने के कारण पालिका को करीब 24-25 लाख रुपये का नुकसान होना तय है। मेले में पालिका की 160 दुकानें किराए पर लगनी हैं। अगर स्थानीय व्यापारियों ने वादे के अनुसार उन दुकानों को किराए पर लिया तो पालिका को कुछ राहत मिल सकती है।
- सुरेश खेतवाल, नगर पालिका अध्यक्ष, बागेश्वर।
काम से हटाने पर पर्यावरण मित्रों में नाराजगी
बागेश्वर। उत्तरायणी मेला सीमित होने के बाद नगर पालिका ने मेला क्षेत्र में सफाई व्यवस्था के लिए अस्थायी तौर पर नियुक्त पर्यावरण मित्रों की सेवा समाप्त कर दी है। इस पर पर्यावरण मित्रों ने गहरी नाराजगी जता पालिकाध्यक्ष के समक्ष विरोध जताया। पर्यावरण मित्रों ने तय अवधि तक उन्हें काम पर रखने की मांग की है। उत्तरायणी मेले के दौरान सफाई के लिए पालिका ने 33 अस्थायी पर्यावरण मित्रों को एक महीने के लिए काम पर रखा था। 25 दिसंबर से पर्यावरण मित्र कार्य कर रहे थे लेकिन मेला अवधि कम होने के बाद पालिका ने उन्हें सेवा मुक्त करने का निर्णय लिया।
इसके विरोध में अस्थायी पर्यावरण मित्रों ने रविवार को पालिका परिसर में हो रही मेला समिति की बैठक में जाकर विरोध जताया। कहा कि कई पर्यावरण मित्र बाहर से भी यहां पहुंचे हैं। अब उन्हें अचानक हटा देने से आने-जाने का किराया भी नहीं निकलेगा। उन्होंने पालिकाध्यक्ष से तय तिथि 26 जनवरी तक कार्य कराने की मांग की। पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने कहा कि मेला अवधि सीमित होने से पालिका अतिरिक्त खर्च वहन नहीं कर सकती है। इस कारण पर्यावरण मित्रों को कार्यमुक्त करने का निर्णय लिया गया है। फिर भी उन्होंने सकारात्मक हल निकालने का भी आश्वासन दिया है।