मुख्य विकास अधिकारी हिमांशु जोशी ने यहां विकास भवन सभागार में जिला अग्रणी बैंक की संभावित ऋण योजनाओं की बैठक में भाग लिया। उन्होंने बैंकों से ऋण जमा अनुपात बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित कुटीर उद्योगों को भी मदद करने के निर्देश दिए।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीडीओ हिमांशु जोशी ने कहा कि बैंकों के ऋण जमा अनुपात की स्थिति ठीक नहीं है। इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिले में दुग्ध उत्पादन की काफी अधिक संभावनाएं हैं। सभी बैैंकर्स डेरी विकास के लिए अधिक से अधिक लोगों को प्रोत्साहित करें।
उन्होंने जिले के किसानों को प्राथमिकता के साथ फसली ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। जिला विकास बैंक नाबार्ड के प्रबंधक बीएस बिष्ट ने बताया कि कृषि और ग्रामीण विकास से संबंधित योजनाओं के लिए अधिक सहयोग की जरूरत है।
फसल, पशुपालन, वर्षा जल संग्रहण, कृषि यंत्रीकरण, भूमि सुधार, मत्स्य पालन, लघु एवं कुटीर उद्योग, शिक्षा, आवास, सामाजिक अवस्थापना आदि की अधिक संभावनाएं हैं।
इसके लिए सभी बैंकों को लोन और अनुदान देना चाहिए। महाप्रबंधक उद्योग बीसी पाठक, मुख्य कृषि अधिकारी वीपी मौर्य, खादी ग्रामोद्योग विभाग के राजीव पाठक और विभिन्न बैंकों के अधिकारियों ने बैठक में भाग लिया।