चनौदा क्षेत्र के कई गांव लंबे समय बाद भी सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। स्पेशल कंपोनेंट प्लान के तहत सोमेश्वर-कौसानी मार्ग से सैजारी मल्ला के लिए पांच किमी लंबी सड़क स्वीकृति के एक दशक बाद भी नहीं बन पाई है। यातायात सुविधा नहीं मिलने से नाराज ग्रामीणों ने अब रोड नहीं बनने पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव में वोट नहीं करने का एलान किया है।
सैजारी मल्ला को जोड़ने वाली सड़क 2005 में स्वीकृत हुई थी। लोनिवि ने इस सड़क का सर्वे भी कर लिया है, लेकिन अब तक सड़क नहीं बन पाई है। इस कारण शैल, बूंगा, तीताकोट, भेटा, बड़सीला, धलरखोला, मेल्टी, भेटाबड़सीला, अंबेडकर गांव सैजारी मल्ला अब तक यातायात से वंचित हैं। इन गांवों में करीब दो हजार से अधिक आबादी निवास करती है। ग्रामीण तीन से पांच किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में गांवों से पलायन हो रहा है। रास्ते खराब हैं।
कई बार तो बीमार रास्ते में दम तोड़ चुके हैं। गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने में काफी दिक्कतें होती हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, निर्वाचन आयोग, लोनिवि को ज्ञापन भेजकर सड़क का निर्माण नहीं होने पर विधानसभा और लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने चेतावनी दी है। ज्ञापन भेजने वालों में युवा सड़क संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह राणा, प्रकाश राम, प्रधान भेटाबड़सीला के प्रधान आनंद राम, तीताकोट के सुधीर टम्टा, महेश सिंह राना, पूरन भंडारी, संतोष कुमार, कमल राम, प्रकाश राना, सोनू राना, रमेश कुमार आदि शामिल हैं।