बागेश्वर। मानसून काल की तैयारियों के लिए डीएम विभागीय अफसरों को सचेत कर रहे हैं, लेकिन विभागों में सजगता नहीं दिखाई दे रही है।
हालात यह हैं कि महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के पैतृक गांव नामतीचेटाबगड़ से जुड़ी सड़क तीन दिन से बंद है। विभागीय अनदेखी से परेशान ग्रामीणों ने खुद ही फावड़े, बेलचे उठाकर सड़क खोलनी शुरू कर दी है। उधर, ओखलधार-पपों-रताइस सड़क भी तीन दिन से बंद है।
महाराष्ट्र के राज्यपाल कोश्यारी के गांव नामती चेटाबगड़ को जाने वाली सड़क पर शनिवार को किसमिला के पास मलबा गिरा। इस कारण यह सड़क मलबे से पट गई थी, जिससे यहां वाहनों की आवाजाही बंद हो गई थी।
क्षेत्र के लोगों ने सड़क खोलने के लिए रविवार को लोनिवि का इंतजार किया लेकिन लोनिवि कपकोट खंड के अधिकारियों ने सुध नहीं ली।
सोमवार को क्षेत्र के लोगों ने सड़क से मलबा हटाकर वाहनों की आवाजाही का प्रयास किया। जीप तो जैसे-तैसे मलबे को पार कर ले रही है लेकिन कार अब भी नहीं चल पा रही है।
इधर, शनिवार को ही कपकोट लोनिवि खंड के अधीन आने वाली ओखलधार-पपों-रताईस सड़क पर मलबा गिर गया था। तब से सड़क पर यातायात ठप है।
नामती चेटाबगड़ को जोड़ने वाली पीएमजीएसवाई की खड़लेख-भनार सड़क बंद है। इस वजह से जेसीबी नामती चेटाबगड़ नहीं भेजी जा सकी। जेसीबी की भी कमी है। सड़क पर कम मलबा अटका है।
पपों-रताईस सड़क को खोलने में ग्रामीण ऐतराज कर रहे हैं। ग्रामीण पहले सुरक्षा दीवार लगाने की मांग कर रहे हैं, इसलिए सोमवार को जेई को मौके पर भेजा गया था। सड़क को जल्द खोलने के प्रयास किए जाएंगे।
- संजय कुमार जोशी, ईई, लोनिवि खंड, कपकोट।