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पूरा करते हैं काम, चाहिए वाजिब दाम

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बागेश्वर तहसील में बेमियादी धरना देतीं आंगनबाड़ी कार्यकर्तियां। - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन रविवार को भी जारी रहा। धरनास्थल पर हुई सभा में कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर उनकी मांगों की अनदेखी की गई वह वह आंदोलन को तेज करेंगी।
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रविवार को सातवें दिन भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बागेश्वर, कपकोट और कांडा तहसील में दिनभर नारेबाजी की। इस दौरान उन्होंने काम के बदले वाजिब दाम के लिए 18 हजार रुपये मानदेय देने, विभागीय पदोन्नति के लिए आयु सीमा हटाने की मांग की। बागेश्वर में धरना देने वालों में जिला उपाध्यक्ष लीला आर्या, कोषाध्यक्ष देवकी रावल, ब्लॉक अध्यक्ष गीता पांडे, मरियम डेविड, राहिला, नीमा, कलावती, सुषमा पांडे, जानकी, नीमा खेतवाल, सोनू आर्या, मुन्नी आर्या, पुष्पा हरड़िया, इंदिरा रावत, हेमा कांडपाल, निर्मला वर्मा आदि थे।
कपकोट तहसील में संगठन अध्यक्ष हंसी ऐठानी, मंजू देवी, शांति देवी, कौशल्या कोरंगा, हीरा गढ़िया, विमला मेहरा, सरला कोरंगा, हेमा आर्या, देवकी कपकोटी, जानकी ऐठानी, द्रौपदी देवी, लीला गढ़िया, शांति ऐठानी आदि मौजूद थे। वहीं कांडा तहसील में भी नीरू, दीपा, नीमा आर्या, मंजू, पूजा, सरोज, हेमा कर्म्याल, राजवंती, पुष्पा, आनंदी, रंजना आदि ने नारेबाजी की।
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पुरानी पेंशन बहाली को होगा आंदोलन
बागेश्वर। पुरानी पेंशन बहाली मंच के राज्य संयोजक मिलिंद बिष्ट ने सभी कार्मिकों से इसके लिए एकजुट होकर संघर्ष का आह्वान किया है। उन्होंने कार्मिकों को याद दिलाया कि उत्तरायणी पर 14 जनवरी 1921 को यहां के लोगों ने अमानवीय कुली बेगार प्रथा का अंत कर अंग्रेजी हुकूमत को झुका दिया था। तब से यह दिन उत्तराखंड के क्रांतिकारी इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। आजकल बागेश्वर में उत्तरायणी मेले की तैैयारी जोरों पर है। इसलिए मिलिंद ने सभी कार्मिकों से एकजुट होकर संघर्ष का संकल्प लेने और उत्तरायणी पर लगने वाले मेले से अपनी मांग को मुखर तरीके से उठाने की अपील की है। ब्यूरो
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