बागेश्वर। पहाड़ों में जंगलों को कटने से बचाने के लिए देवी-देवताओं को समर्पित करने का चलन रहा है लेकिन पहली बार जिले के चार गांवों के लोगों ने मैचुला मैया मंदिर परिसर और पहाड़ी के पौधों को संरक्षित रखने के लिए यह अनूठी पहल की है। वन विभाग के मार्गदर्शन में ग्रामीणों ने मैचुला मैया मंदिर परिसर और पहाड़ी को देवदार के पौधों से आच्छादित करने का लक्ष्य रखा है। पौधों को अराजक तत्वों और जानवरों से बचाने के लिए मैचुला मैया को समर्पित कर दिया है।
मैचुला मैया मंदिर कराला पालड़ी गांव की पहाड़ी पर स्थित है। मंदिर की पहाड़ी पर पेड़-पौधों की संख्या बेहद कम है। मानसून काल में जो पौधे लगाए जाते थे उनको जानवर चर जाते थे। बचे पौधे जंगल की आग की भेंट चढ़ जाते थे जिन्हें बचाने के लिए मंदिर के पास बसे गांव कराला पालड़ी, जनौटी पालड़ी, जोशी पालड़ी और बंगचूड़ी के ग्रामीणों ने एक मत होकर मंदिर परिसर और पहाड़ी के पौधे मां मैचुला को समर्पित करने का फैसला लिया। कराला पालड़ी के ग्राम प्रधान मोहन सिंह करायत ने बताया कि मंदिर परिसर में एक बोर्ड लगाया गया है। स्पष्ट रूप से पौधे मां मैचुला को समर्पित करने और इन्हें नुकसान पहुंचाने वालों के मां मैचुला का अभिशाप झेलने की बात लिखी गई है।
रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि वन विभाग ने पौधों को बचाने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर यह पहल की है। अगर लोगों का सहयोग मिला तो आने वाले समय में मैचुला मंदिर की वृक्षविहीन पहाड़ी देवदार के वन के रूप में विख्यात होगी।