बागेश्वर। जिले में पिरूल से लगने वाली आग को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। जंगलों मेंं आग लगने के मुख्य कारक पिरूल की खरीद के लिए जिले में 27 केंद्र बनाए हैं। इन केंद्रों में 10 रुपये प्रति किलो की दर से पिरूल खरीदा जा रहा है। ग्रामीणों को विभाग की ओर से पिरूल लाने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है।
जिले के जंगलों में चीड़ के पेड़ बहुतायत में होने से पिरूल अधिक मात्रा में पाया जाता है। पिरूल से वनाग्नि की संभावना बढ़ जाती है। आग पर काबू पाने में वन विभाग को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। इससे बचने के लिए अब वन विभाग ने नई तरीका निकाला है। विभाग ने जिले में एकत्रीकरण केंद्रों का संचालन शुरू कर दिया है। महिला मंगल दल, नवयुवक मंगल दल, स्वयं सहायता समूह पिरूल को एकत्र कर एकत्रीकरण केंद्रों पर विक्रय कर सकते हैं। एकत्रीकरण केंद्र पर वन विभाग के कर्मचारी पिरूल का वजन कर भुगतान करेंगे।
इन केंद्रों में होगी पिरूल की खरीद
बागेश्वर। जिले के बागेश्वर रेंज के जौलकांडे वन परिसर, नक्षत्र वाटिका लकड़ियाथल, छतीना पौधालय, हर्बल गार्डन कठायतबाड़ा, वन परिसर कनगाड़छीना, झिरौली और वन रक्षक चौकी कनगाड़छीना में केंद्र स्थापित किए गए हैं। बैजनाथ रेंज के वन परिसर सिरकोट, वन परिसर कौसानी, वन परिसर महरपाली, वन परिसर पोखरी और बज्वाड़ में खरीद केंद्र बनाया है। गढ़खेत रेंज के वन परिसर जिंतोली, वन परिसर वज्यूला, वन परिसर गढ़खेत, वन परिसर जखेड़ा और कुलांऊ वन परिसर में पिरूल के एकत्रीकरण की व्यवस्था की गई है। कपकोट रेंज के जखेड़ी और कालीधार कंपाट संख्या दो में पन विभाग पिरूल की खरीद करेगा। धरमघर रेंज के देवतोली, सनीउडियार, वन परिसर दोफाड़, खेती, वन परिसर कांडा, लेटला, चौकोड़ी और बैड़ा में क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।
जिले में पिरूल के एकत्रीकरण के लिए केंद्र संचालित कर दिए हैं। केंद्रों में आकर ग्रामीण समूहों के माध्यम से पिरूल दे सकते हैं। विभाग के पास असीमित मात्रा में पिरूल खरीदने की क्षमता है। लोग अधिक से अधिक पिरूल केंद्र में ला सकते हैं। एकत्र किए गए पिरूल को सितारगंज, रुद्रपुर और अल्मोड़ा भेजा जाएगा।
-ध्रुव सिंह मर्ताेलिया, डीएफओ, बागेश्वर