बागेश्वर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भले ही मानसून काल में हो रहे हों लेकिन धरातल पर इसका असर नहीं दिख रहा है। गांव-गांव में नेता और प्रचारक बारिश और उमस की चिंता किए बगैर दौड़ रहे हैं। नेताओं की थकान तो इन दिनों गायब हो गई है। चुनाव के चलते गांव भी गुलजार हैं।
पंचायत चुनाव में सबसे अधिक एरिया जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी को तय करना होता है। कम समय में अधिक लोगों तक पहुंचने की चुनौती के कारण प्रत्याशी दिन-रात की चिंता किए बगैर प्रचार में लगे हैं।
बीतें दिनों एक प्रत्याशी के गधेरे को पार करते समय बहाव में डगमगाने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पंचायत चुनाव में पार्टी सिंबल नहीं होने के कारण कई बार राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को गांवों में खूब सुनने को भी मिल रहा है। मतदाता उन्हें दूसरी पार्टी का समझकर राजनीतिक दलों के झूठे वादे और दावों को लेकर कोसने लगते हैं। प्रत्याशी भी पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
कुछ बड़े नेताओं के लिए पंचायत चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अपनी जमीन मजबूत करने का बड़ा मंच भी साबित हो रहा है। उनके साथ चलने से प्रत्याशी भी स्वयं को सुरक्षित मान रहे हैं। हालांकि इस दौरान गांवों की रौनक सूखे में पानी के समान लग रही है।