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रिगांल के उत्पादों से हो सकती है अच्छी कमाई

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रिंगाल के उत्पादों के साथ ग्रामीण। - फोटो : BAGESHWAR
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कपकोट/बागेश्वर। उत्तराखंड हस्तशिल्प विकास परिषद ने लोक विज्ञान संस्थान (पीएसआई) देहरादून के माध्यम से महिला भवन शामा में पांच दिवसीय ट्रेनिंग दी गई। इसमें रुद्रप्रयाग के प्रेम कुमार मुख्य प्रशिक्षक रहे। उ
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न्होंने ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में रिंगाल से दैनिक जीवन में उपयोग आने वाले सामान जैसे डोका (घास एवंगोबर आदि ढोने की टोकरी), सूप, म्वट (अनाज सुखाने की चटाई जैसे), डलिया, पालना आदि सामान काफी पहले से बनाए जाते हैं।
अब पीएसआई हस्तशिल्पियों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है। इन समूहों को एनआरएलएम से जोड़कर प्रशासन से मदद दिलाई जा रहा है। कई अन्य महानगरों से भी रिंगाल के सामानों की काफी मांग आई है। इसकी पूर्ति के लिए ऐसे शिविर कई जगह लगाए जा रहे हैं।
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