बागेश्वर। रोजाना पहाड़ की सड़कों पर चलने वालीं सात बसें यहां अपनी उम्र पूरी कर चुकी हैं। पांच लाख किमी चलने के अलावा पांच साल से अधिक समय तक पहाड़ में चलीं इन बसों की सेवाएं अब मैदानी क्षेत्रों में ली जाएंगी। डिपो की इन बसों को शुक्रवार को टनकपुर और हल्द्वानी भेजा जाएगा।
पिछले साल डिपो में 10 नई बसों के आने के बाद कुल 25 बसें हो गई थीं। इसमें एक पुरानी बस को नीलाम कर दिया गया। शेष 24 में से 12 बसों का संचालन दिल्ली व बरेली रूट पर किया जा रहा है। 12 बसें डिपो परिसर में खड़ी हैं। चालक-परिचालकों की कमी के चलते जिले में नए रूट खुलने की संभावना भी नहीं है। डिपो की अधिकतर बसें अपनी समय सीमा पूर्ण चुकी हैं। इससे उनके पहाड़ों में संचालन के दौरान समस्याएं आती हैं। कई बार पुरानी बसें अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही खराब हो जाती थीं।
अब रोडवेज मुख्यालय ने इन बसों को मैदानी जिलों में दौड़ाने का निर्णय लिया है। शुक्रवार काे डिपो की सात बसें मैदानी जिलों के लिए रवाना होंगी, जिनमें से पांच बसें टनकपुर डिपो और दो हल्द्वानी डिपो भेजी जाएंगी। डिपो के कार्यशाला प्रभारी अनिल सिंह ने बताया कि बसों को ले जाने के लिए चालक पहुंच चुके हैं। आज सभी बसों को रवाना कर दिया जाएगा।
तीन बसें चल चुकी हैं आठ लाख किमी
रोडवेज डिपो से मैदानी जिलों में भेजी जा रहीं सात बसें मानकों के अनुसार पांच लाख किलोमीटर की दूरी और सात साल की आयु पूर्ण कर चुकी हैं। इनमें से तीन बसें आठ लाख किलोमीटर चल चुकी हैं। डिपो कार्यशाला प्रभारी अनिल सिंह ने बताया कि मुख्यालय से मानकों में बदलाव किए गए हैं। अब बसों की फिटनेस स्थिति के आधार पर मानक तय किए जा रहे हैं। पहले पांच लाख किमी और सात साल की उम्र वाली बसों को पहाड़ में चलाने का मानक तय था।