स्वयं सहायता समूह में पांच महिलाएं प्रत्यक्ष और 1200 अप्रत्यक्ष रूप से शामिल
कपकोट (बागेश्वर)। जैविक उत्पाद की मांग दिनोंदिन बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पैदा होने इन खाद्य उत्पादों की बिक्री से कपकोट क्षेत्र की महिलाएं सालाना तीन से चार का कारोबार कर रही हैं। एक हजार से अधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल रहा है।
दो साल पहले तहसील क्षेत्र की पांच महिलाओं ने थ्रीके जैविक आउटलेट नामक स्वयं सहायता समूह की शुरूआत की थी। समूह से कमला कोश्यारी, खष्टी कोरंगा, ममता मेहता, इंद्रा धर्मशक्तू रूप से जुड़ी हैं। अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1200 महिलाओं को रोजगार से जोड़ा गया है। इन महिलाओं से जैविक उत्पाद पहाड़ी लाल चावल, राजमा, काले भट्ट, गहत, सोयाबीन, बद्री गाय का घी, शहद, अचार, कीवी का जूस, जैली, घर के बने मसाले आदि की खरीद की जाती है। बाजार में इन सामग्रियों की अच्छी मांग हैं। समूह जिले के बाजारों के अलावा बाहर की मार्केट तक भेजा जाता है। कपकोट में खोले गए आउटलेट से भी अच्छी इनकम होती है, एक महिला को रोजगार भी मिला है। जैविक आउटलेट समूह दो बार देहरादून और पंत नगर कृषि विश्वविद्यालय में लगी प्रदर्शनी में भी स्टॉल लगा चुका है। समूह का लक्ष्य जैविक कारोबार को ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से फैलाना और अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार से जोड़ना है।
कोट
महिला स्वयं सहायता समूह बनाने से पहले हमने एक कृषि फर्म (एफपीसी) खोलने की सोची। हालांकि उसके संचालन की जटिल प्रक्रिया के कारण वह विचार छोड़ना पड़ा। समूह गठन का निर्णय काफी अच्छा रहा। आज कई महिलाएं इससे लाभान्वित हो रही हैं।
ममता मेहता, समूह सदस्य,
कोट
समूह के माध्यम से शुद्ध जैविक खाद्य सामग्री का ही कारोबार किया जाता है। मल्ला और बिचला दानपुर क्षेत्र के गावों में जाकर महिलाओं से संपर्क करके सामग्री खरीद करते हैं। महिला किसानों को घर पर रही रोजगार के मौके उपलब्ध कराए गए हैं।
खष्टी कोरंगा, समूह सदस्य,
कोट
समूह का गठन क्षेत्र के जैविक उत्पाद को लोगों तक पहुंचाना और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था। महिला किसानों के सहयोग से मात्र दो साल के भीतर अच्छी सफलता मिली है। भविष्य में समूह के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
कमला कोश्यारी, समूह मुखिया,