बागेश्वर। कोरोना के बढ़ते हुए मामलों को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने 15 जनवरी तक राजनीतिक दलों की रैली, सभा, जुलूस पर प्रतिबंध लगाया है। वर्चुअल माध्यम से रैली और सभा करने की अनुमति दी है। हालांकि बागेश्वर जिले के तमाम इलाके संचार विहीन हैं। ऐसे में इन इलाकों में वर्चुअल रैली और सभाओं के कोई मायने नहीं हैं।
संचार सुविधा न होने से जिले के कपकोट तहसील के कीमू, लीती, कर्मी, रातिरकेठी, गोगिना समेत तमाम गांवों के लोग वर्चुअल रैलियों से नहीं जुड़ पाएंगे। इतना ही नहीं यह लोग सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले चुनाव प्रचार से भी दूर रहेंगे। संचार विहीन इलाकों के लोगों तक राजनीतिक दल कैसे अपनी बात पहुंचाएंगे, यह सबसे बड़ी समस्या होगी। इन इलाकों में डोर टू डोर प्रचार ही एकमात्र पहुंच का साधन होगा।
वर्चुअल रैली, सभा की बात पर संचार विहीन इलाके के लोगों का कहना है कि यां त फोनकि घंटी नी बाजनि, कसिक होल वर्चुअल प्रचार यानी यहां तो फोन की घंटी तक नहीं बजती, वर्चुअल प्रचार कैसे होगा। कुल मिलाकर संचार विहीन इलाकों तक पहुंच बनाने के लिए प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं को खूब पसीना बहाना पड़ेगा। जिले में करीब 67 पोलिंग बूथ संचार विहीन हैं।
भाजपा केंद्र में लगातार सात साल से काबिज है। डिजिटल इंडिया का नारा फेल हो गया है। संचार विहीन इलाकों में प्रचार में दिक्कत आएगी। 5-5 कार्यकर्ताओं की टोलियां बनाकर गांवों में प्रचार किया जाएगा।
ललित फर्स्वाण, पूर्व विधायक कपकोट कांग्रेस प्रदेश महामंत्री
वर्चुअल रैलियां और सभाएं बड़े नेताओं की होनी हैं। जिले की दोनों सीटों के 376 बूथों के लिए पांच-पांच कार्यकर्ताओं की टोली बनाई गई है। संचार विहीन इलाकों में बूथ लेवल पर कार्यकर्ता प्रचार करेंगे।
शिव सिंह बिष्ट, भाजपा जिलाध्यक्ष बागेश्वर
भाजपा सरकार की सबसे बड़ी नाकामी ही कही जाएगी कि कपकोट विधानसभा क्षेत्र के तमाम इलाके संचार सेवा से नहीं जुड़ पाए हैं। छोटे समूह बनाकर गांवों में प्रचार किया जाएगा। मतदाताओं तक पहुंचा जाएगा।
भूपेश उपाध्याय, आप नेता
कपकोट के संचार विहीन इलाकों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (ओएफसी) बिछाने के लिए जिला पंचायत को 10 लाख रुपये दिए गए हैं। ओएफसी बिछने के बाद सचार विहीन इलाकों में इंटरनेट काम करने लगेगा।
विनीत कुमार जिला निर्वाचन अधिकारी बागेश्वर