बागेश्वर। खेती और पशुपालन हमेशा से आय कमाने का बेहतर जरिया रहा है। हालांकि कड़ी मेहनत और चुनौतियों के कारण लोगों का इन कार्यों से रुझान कम हो रहा है। बावजूद इसके कुछ लोग खेती और पशुपालन से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। इन्हें आजीविका परियोजना की तरफ से संचालित दुग्ध विक्रय केंद्र से विक्रय का लाभ मिल रहा है।
सरस मार्केट में संचालित दूध डेयरी में नगर और समीपवर्ती चौरासी, फल्टनीया, छतीना, मंडलसेरा, खोली, भागीरथी, जोग्याणी रौ, जोशीगांव, पंद्रहपाली, बिलौना से 25 परिवार दूध लेकर आते हैं। रोजाना 110 से 120 लीटर दूध डेयरी से विक्रय किया जाता है। डेयरी की संचालक प्रेमा कोरंगा ने बताया कि डेयरी को खुले हुए 10 साल से अधिक का समय हो गया है।
यह जिले की पहली दूध डेयरी थी, पहले यहां रोजाना 200 लीटर दूध पहुंचता था। दूध की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने से डेयरी अब भी लोगों के भरोसे पर खरा उतर रही है। बाजार में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ने के बावजूद दुग्ध उत्पादक और ग्राहकों का सहयोग मिल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक दुग्ध उत्पादक को महीने में पांच से 8000 की आय होती है। डेयरी के माध्यम से उन्हें दूध विक्रय की सुविधा और अच्छी आमदनी हो रही है। डेयरी को भी लाभ मिल रहा है।