बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बागेश्वर ब्लॉक के लेटी गांव से पलायन बढ़ रहा है। पलायन की मार से इस गांव में अब तक 15 घरों में ताला लग चुका है। इंटर कॉलेज न होने से इस गांव के बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए क्वैराली या बागेश्वर आना पड़ता है, जबकि यहां से क्वैराली दस और बागेश्वर 12 किलोमीटर दूर है। एएनएम सेंटर इस गांव से करीब छह किमी दूर है। जिसके चलते महिलाओं को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती है। चार साल पहले बनी गांव की सड़क में डामरीकरण नहीं हो पाया है।
जिला मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर इस गांव में सब्जी अच्छा उत्पादन होता है। पहले इस गांव में 130 परिवार रहते थे। इनमें से 15 परिवार बागेश्वर, हल्द्वानी व दिल्ली पलायन कर चुके हैं। वर्तमान में यहां 115 परिवार ही रह रहे हैं। क्षेत्रवासी बताते हैं कि गांव निवासी सीआरपीएफ के जवान शिव सिंह, बंगाल इंजीनियर के हवलदार पूरन सिंह, आर्मी सप्लाई कोर में तैनात भूपाल सिंह की सेवाकाल में ही मौत हुई थी। ग्रामीण यहां के राउमावि का उच्चीकरण करने, सड़क का नाम सेवाकाल में दिवंगत हुए उक्त जवानों के नाम पर रखने की मांग कर रहे हैं। लेकिन शासन द्वारा इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव की समस्याओं का समाधान न होने से लोगों में काफी आक्रोश बना हुआ है।
प्रसव पीड़िताओं को काफी परेशानी होती है
ग्राम प्रधान दीपा देवी कहती हैं कि गांव में एएनएम सेंटर न होने से प्रसव पीड़िताओं को छह किमी दूर धारी ले जाना पड़ता है। इसमें उन्हें काफी दिक्कतें होती हैं। पंचायत घर का जीर्णोद्धार नहीं हो पा रहा है।
सिंचाई के लिए नहीं है नहर
सरपंच और पूर्व प्रधान गोविंद सिंह कहते हैं कि गांव के लोग सब्जियां बेचने के लिए बागेश्वर ले जाते हैं। सब्जी उत्पादन की काफी संभावनाओं के बाद भी गांव में सिंचाई के लिए नहर नहीं है।
बदहाल है सड़क
गोविंदी देवी कहती हैं गांव के लिए सड़क तो काट दी। डामरीकरण न होने से उसमें गड्ढे ही गड्ढे हैं। बदहाल सड़क दुर्घटना को दावत दे रही है।
उच्चीकरण की मांग पर सब चुप हैं
गोविंद सिंह कहते हैं राउमावि के उच्चीकरण की मांग पर सब चुप हैं। बच्चों को इंटर की पढ़ाई के लिए बागेश्वर या क्वैराली जाना पड़ता है। बच्चे अकेले स्कूल जाने में डरते हैं।