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प्रवासी बोले, गांव में रहेंगे, मशरूम की खेती करेंगे

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कपकोट के दुलम गांव में पैदा हो रहा मशरूम। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : AMAR UJALA
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बागेश्वर। लॉकडाउन के कारण बेराेजगार हुए प्रवासी युवा अब गांव में ही स्वराेजगार कर आत्मनिर्भर बनने की राह में चलने की दिशा में कदम बढ़ाने लगे हैं। युवा मशरूम उत्पादन पर रुचि दिखा रहे हैं। लॉकडाउन के चलते करीब 21 हजार प्रवासी बाहरी प्रदेशों और प्रदेश के अन्य जिलों से अपने गांव लौटे हैं। राेजगार छिनने के बाद प्रवासी गांव में ही स्वरोजगार करने की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। कपकोट के दुलम निवासी मशरुम उत्पादक भगवत सिंह काेरंगा प्रवासी युवाओं को मशरूम उत्पादन के गुर सिखा रहे हैं। प्रवासी युवा इसमें रुचि भी दिखाने लगे हैं। ---::: मशरूम उत्पादन, खेती से बनेंगे आत्मनिर्भर ::: बागेश्वर। पाेथिंग निवासी जगत सिंह गढ़िया गुजरात की निजी कंपनी में नाैकरी करते थे। लॉकडाउन के बाद कंपनी बंद हाेने से नाैकरी चली गई और वह अपने गांव चले आए। उन्होंने बताया कि वह अब गांव में मशरूमन उत्पादन, खेती-बाड़ी के जरिए आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। वह मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। --::: हालात ठीक होने तक गांव में करेंगे स्वरोजगार :: बागेश्वर। हड़बाड़ निवासी महेंद्र सिंह डसीला रुद्रपुर सिडकुल में नाैकरी करते थे। लॉकडाउन के बाद वह अपने गांव चले आए। उन्होंने मशरुम की खेती करना शुरु कर दिया है। महेंद्र का कहना है कि जब तक हालात ठीक नहीं हाेते वह गांव में ही स्वरोजगार कर करेंगे।
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जगत सिंह गढ़िया। - फोटो : AMAR UJALA
जगत सिंह गढ़िया।
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महेंद्र सिंह डसीला। - फोटो : AMAR UJALA
महेंद्र सिंह डसीला।
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