मानव संसाधन विकास मंत्रालय और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत राष्ट्रीय कला उत्सव का आयोजन हुआ।
इसका आगाज यहां कुमाउंनी वंदना के साथ हुआ। विभिन्न ब्लॉक क्षेत्रों से आई टीमों ने लोक संस्कृति की खास विधाओं पर कार्यक्रम पेश किए।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए मुख्य शिक्षा अधिकारी आरसी आर्य ने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्र अपनी जड़ों से जुड़ सकेंगे। विद्यालयों का शैक्षिक वातावरण समृद्ध होगा।
रमसा के जिला परियोजना अधिकारी डॉ. बृजेंद्र जोशी ने कहा कि कला उत्सव के मूल्यांकन में ई प्रोजेक्ट की भूमिका होने के कारण परंपरा और आधुनिकता के मध्य समन्वय बनेगा।
जिला संदर्भ व्यक्ति डॉ. शैलेंद्र धपोला ने कार्यक्रम की रूपरेखा पेश की। जीआईसी गरुड़ ने कुमाउंनी रामलीला, ऐठाण ने बेटी बचाओ नाटक, बागेश्वर ने जागर, मंडलसेरा ने हुड़की बौल, सलानी ने कुमाउंनी संगीत, दोफाड़ ने झोड़ा, आरे की टीम ने चांचरी, ऐठाण ने झोड़ा, सलानी ने छपेली, दृश्य कला में कांडा ने ऐपण, हड़बाड़ ने यज्ञ वेदी, ऐठाण ने अल्पना चित्र पेश किए।
रंगकर्मी उमेश राठौर निर्णायक हैं। दीप पांडे, डॉ. राजीव जोशी ने संचालन किया। वहां पीएनबी के प्रबंधक डीसी आर्य, कार्यक्रम संयोजक संगीता टम्टा, सह संयोजक जगदीश जोशी, ओमप्रकाश पुरोहित, सुरेश राम, कविता जोशी, भारत भूषण परिहार, कैलाश चंदोला, डॉ. केएस रावत, डॉ. वीके थपलियाल, डीसी जोशी, दीप जोशी, प्रमोद तिवारी आदि थे।