बागेश्वर। शामा के किसानों की दिखाई पहल कपकोट के अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रही है। सरयू घाटी और फरसाली क्षेत्र के किसान भी अब कीवी में कारोबार खोजने लगे हैं। खलझूनी, फरसाली, मल्लादेश और तिमिलाबगड़ क्षेत्र के किसान भी कीवी की खेती करने लगे हैं। संजीवनी संस्था के सहयोग से 162 किसान इस मुहिम से जुड़ चुके हैं।
संस्था के विनोद सिंह घुघतियाल बताते हैं कि परंपरागत खेती से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था। किसान बदलाव चाहते थे, उन्हें कीवी, रेशम आदि व्यावसायिक खेती से जोड़ने की पहल की गई। खलझूनी गांव से शुरू हुआ कीवी की पैदावार का दायरा बढ़कर फरसाली क्षेत्र तक पहुंच गया है। खलझूनी गांव में कीवी की पैदावार भी होने लगी है। बाकी गांवों में भी किसानों ने अच्छी शुरूआत की है। आने वाले वर्षों में किसानों को इसका काफी लाभ मिलेगा।
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शामा का भ्रमण कर सीखी बारीकियां
शुक्रवार को किसानों ने शामा जाकर किसान भवान सिंह कोरंगा के बागान का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों को कीवी की उन्नत प्रजाति, भूमि का चयन, समय पर गड्ढा खुदान, जैविक खाद का प्रयोग, सिंचाई का प्रबंध, मानसून सीजन में पौधों के रखरखाव, निराई-गुड़ाई, भविष्य में कारोबार की संभावना आदि की जानकारी दी गई। इस मौके पर संजीवनी के परियोजना प्रबंधक संतोष कुमार जोशी, दीवान सिंह, जनजाति विकास परियोजना समिति के अध्यक्ष हीरा सिंह, किसान मोहन सिंह, प्रताप सिंह, भूपाल सिंह, नंदन सिंह, कैलाश सिंह, पूरन सिंह, उमेद सिंह, रेखा देवी आदि मौजूद रहीं।