बागेश्वर के आदर्श कॉलानी में एक घर में होली गायन करने पहुंची महिला होल्यार। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। होली का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। खड़ी होली गायन के अंतिम दिन जिलेभर के गांवों में सुबह से रात तक पुरुष होल्यारों ने खड़ी होली गायन किया। सोमवार को रंगभरी होली के साथ पांच दिन से चल रहे पर्व का रंगारंग समापन होगा।
ग्रामीण अंचलों की होली का अलग ही आनंद है। जिले के अधिकतर गांवों में होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। होल्यार पांच दिनों तक चलने वाले पर्व में घर-घर जाकर खड़ी होली का गायन करते हैं। छलड़ी से पूर्व के दिनों में खड़ी होली गीत गाए जाते हैं। रविवार को गांवों में सुबह से लेकर रात तक होली गायन का कार्यक्रम चलता रहा। दोफाड़ के 13, खोली के छह, सात-रतबे के छह गांवों के होल्यारों ने एक साथ होली गायन किया। जिसके चलते सूर्यास्त के बाद भी होली गायन चलता रहा। हालांकि कई गांवों में दिन के समय ही होली गायन पूरा कर लिया गया था। होली की मस्ती में डूबे होल्यारों ने गोरी तेरौ बालम छोटो छौ..., हां हो जेठानी देवर तुम्हारे ना बोलै...., टूट गई कंगना की तीली..., आज बिरज में होरी रे रसिया.... सहित तमाम खड़ी और बैठकी होली गीत गाए। इस दौरान होल्यारों का स्वागत अबीर, गुलाल और रंगों से किया गया। उन्हें आलू के गुटके, चाय, गुझिया आदि भी परोसी गई। इधर, नगर क्षेत्र के बाड़ीखालसा, आदर्श कॉलोनी, नुमाइशखेत, मंडलसेरा आदि क्षेत्रों की कॉलोनियों में छोटी-छोटी होली कमेटियों ने खड़ी होली का आयोजन किया। होल्यारों ने प्रत्येक घरों में होली गायन किया। इस विधा को संरक्षित करने का संकल्प भी लिया।
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