बागेश्वर के भराड़ी टैक्सी स्टैंड में काफल खरीदते लोग। संवाद
बागेश्वर। जंगलों में पाया जाना वाला जंगली फल काफल बाजार पहुंच चुका है। इस सीजनल फल की लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं। यह फल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक माना जाता है। इसके सेवन से स्ट्रोक और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। बिक्री बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों से काफल लेकर आने वाले लोगों के चेहरे खिले हुए हैं।
बागेश्वर बाजार में कैसिया, धारीडोला, कांडा, विजयपुर, भारगाड़, धरमघर, कमेड़ी देवी सहित कई अन्य स्थानों से ग्रामीण काफल लेकर बाजार में बिक्री के लिए आ रहे हैं। वर्तमान में यह बाजार में 400 रुपये किलो बिक रहा है। कांडा के मोहन सिंह का कहना है कि वह हर रोज जंगलों से काफल तोड़कर बाजार ला रहे हैं। उन्होंने बताया कि लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं। कमेड़ी देवी के जगदीश जोशी का कहना है कि वह एक दिन छोड़कर रोज काफल बेचने बाजार आते हैं। एक दिन में वह 1500 से 1600 रुपये की आय कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह बाजार के अलावा फोन से डिमांड मिलने पर काफल भिजवा रहे हैं और ऑनलाइन रुपये ले रहे हैं।
चरक संहिता में भी है काफल का जिक्र
बागेश्वर। काफल के अनेक औषधीय गुण हैं। चरक संहिता में भी इसके अनेक गुणकारी लाभों के बारे में वर्णन किया गया है। काफल के छाल, फल, बीज और फूल सभी का इस्तेमाल आयुर्विज्ञान में किया जाता है। कफाल का वैज्ञानिक नाम माइरिका एसकुलेंटा है। इसमें एंटी-आक्सीडेंट काफी मात्रा में पाया जाता है, जो पेट से संबंधित बीमारियों के लिए काफी लाभदायक होता है। संवाद