अल्मोड़ा/कौसानी/बागेश्वर। जंगलों की आग थमने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार को अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ मोटर मार्ग पर पेटशाल के समीप और कौसानी के अनाशक्ति आश्रम के पास के जंगल में आग लग गई। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। इस बीच लाखों की वन संपदा जलकर राख हो गई।
शुक्रवार सुबह पेटशाल के समीप मुख्य मार्ग से सटे जंगल में आग लग गई। देखते ही देखते आग पूरे जंगल में फैलने लगी। जंगल को आगोश में लेने के साथ ही आग की तेज लपटें आवासीय क्षेत्र की ओर भी बढ़ने लगीं, जिससे लोगों में हड़कंप मच गया। लोगों ने फायर सर्विस अल्मोड़ा को सूचना दी। सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अग्निशमन प्रभारी उमेश चंद्र परगाई के निर्देश पर दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे। लंबे क्षेत्र में फैली आग पर घंटों की मशक्कत के बाद फायर कर्मियों ने काबू पा लिया। इस बीच वन संपदा को आग से काफी नुकसान पहुंचा। फायर टीम में एलएफएम हरीश राम टम्टा, हरनाम सिंह राणा, चालक पंकज सिंह, फायर मैन प्रकाश पांडे, भुवन कुमार आदि रहे।
इधर शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे कौसानी के अनाशक्ति आश्रम के पास के जंगल में अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग का दायरा बढ़ने लगा। स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी वन विभाग को दी। डीएफओ बीएस शाही का कहना है कि वन कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। उन्होंने कहा कि वनाग्नि की रोकथाम के लिए 29 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। वनों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने लोगों से भी जंगलों को आग से बचाने में सहयोग देने की अपील की है। बता दे कि अग्निकाल शुरू होने के बाद जिले में जंगलों में आग लगने की 6-7 घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा वन विभाग
अल्मोड़ा। जंगलों में आग लगने की घटनाएं शुरू हो गई हैं। वन कर्मियों के सामने कम मानव संसाधन में वनाग्नि पर काबू पाने की चुनौती है, क्योंकि अल्मोड़ा वन प्रभाग क्षेत्र में स्वीकृत पदों के सापेक्ष कई पद खाली चल रहे हैं।
15 फरवरी से फायर सीजन शुरू हो गया है और अल्मोड़ा वन प्रभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। यहां पर 130 वन रक्षक के स्वीकृत हैं, इनके सापेक्ष केवल 27 की तैनाती है। इसके अलावा 109 वन दरोगा के स्वीकृत पदों के सापेक्ष केवल 50 पदों पर ही लोग हैं। इनमें से भी ज्यादातर वन दरोगा 55 साल से ज्यादा हैं जिनको वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए सोच समझकर ही भेजा जाता है। देखा जाए तो वन प्रभाग आधे से भी कम मानव संसाधन में आग बुझाने का काम करेगा। ऐसे में वनाग्नि को रोकना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती है।
अल्मोड़ा वन प्रभाग में वनाग्नि की घटनाएं भी काफी होती हैं। अल्मोड़ा जनपद में 70 हजार हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि, 70 हजार हेक्टेयर वन पंचायत क्षेत्र और 40 हजार हेक्टेयर सिविल बन हैं। इतने बड़े क्षेत्र में अगर कहीं वनाग्नि की घटना होती है तो उस पर काबू पाने के लिए वन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। कई क्षेत्र तो ऐसे हैं जहां पर कोई भी वन रक्षक नहीं है और वहां पर आग लगने की घटना के बाद वहां जाने तक में ही काफी समय लग जाता है।
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वनाग्नि की घटनाओं पर काबू पाने के लिए वन पंचायत के सरपंचों का भी सहयोग लिया जाएगा। जंगल की आग पर काबू पाने के लिये सभी लोगों को मिलकर काम करना होगा। - महातिम यादव, प्रभागीय वनाधिकारी, अल्मोड़ा वन प्रभाग