भेटा गांव में दलित सोहन राम की हत्या के बाद बागेश्वर में दलित संगठनों की ओर से निकाली गई रैली में शामिल होकर आजादी के नारे लगाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग जोर पकड़ने लगी है। विभिन्न संगठनों ने जिला प्रशासन से रैली में शामिल शिक्षक नेताओं और अन्य कर्मचारियों को चिन्हित करने की मांग की है।
पीयूसीएल के उपाध्यक्ष एनबी भट्ट और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष घनानंद जोशी ने डीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा कि भेटा गांव में हुई दलित युवक सोहन राम की हत्या का सभी को गहरा दुुख है। परंतु घटना के मुख्य आरोपी ललित कर्नाटक और सह अभियुक्त बनाए गए आनंद कर्नाटक, घनश्याम कर्नाटक की गिरफ्तारी के बावजूद 12 अक्तूबर को बागेश्वर शहर में दलित संगठनों ने रैली निकालकर मनुवाद, ब्राह्मणवाद से आजादी दो के नारे लगाए थे। उनका कहना है कि इस रैली में लगाए गए नारों से समाज में वैमनस्यता फैलाने का कार्य किया गया।
राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों द्वारा आयोजित इस रैली में शिक्षकों और राजकीय कर्मचारियों का शामिल होना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा है कि रैली में शामिल होकर कर्मचारियों ने सेवा नियमावली एवं कर्मचारी आचरण नियमावली की धज्जियां उड़ाई हैं। उन्होंने डीएम से ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। रैली के आयोजन से जातिवाद जैसी भावना को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने रैली का आयोजन करने वाले सभी राजनीतिक दलों और गैर राजनीतिक संगठनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
आजादी के नारे लगाने की उक्रांद ने की भर्त्सना
बागेश्वर। बागेश्वर में निकाली गई रैली में आजादी के नारे लगाने की उत्तराखंड क्रांति दल ने भी तीखी भर्त्सना की है। उक्रांद के जिलाध्यक्ष मनोज जोशी ने कहा है कि इस तरह के नारे लगाकर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इस मामले में बसपा, कांग्रेस व भाजपा पर राजनीति करने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा है कि राजनीति करने वाले लोगों को उन गांवों में जाकर देखने की जरूरत है जहां पर आजादी के बाद से आज तक एक भी दलित परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी नहीं मिल पाई है। जोशी ने भाजपा विधायक चंदन राम दास के भेटा के 10 परिवारों को विस्थापित करने संबंधी बयान को भी समाज को बांटने वाला करार दिया है।