बागेश्वर। कोरोना संक्रमित होने पर होम आइसोलेट लोगों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक किट प्रदान की जा रही है। कहने को किट में दवाइयों और ऑक्सीमीटर सहित नौ सामग्रियों का विवरण अंकित है, लेकिन मरीज तक केवल दवाइयां और मास्क ही पहुंच पा रही है। किट में मरीज का कूड़ा रखने के लिए जैवचिकित्सकीय कचरे का थैला तक नहीं दिया गया है। इस कारण मरीज कूड़ा जलाने के लिए मजबूर हैं।
जिले में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। शुक्रवार तक कोरोना के 1089 सक्रिय मामले थे। इनमें से 1023 लोग होम आइसोलेट हैं। होम आइसोलेट मरीजों को विभाग की ओर से आइसोलेशन किट दी जा रही है। किट के लिफाफे में दर्ज विवरण के अनुसार इसमें तीन लेयर वाला मास्क, थर्मामीटर, हैंड सैनिटाइजर, पल्स ऑक्सीमीटर, जैवचिकित्सकीय कचरे का थैला, आइवरमेक्टिन और विटामिन की दवा, चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दवाइयां, होम आइसोलेशन निर्देशिका और कोविड उपरांत देखभाल की पुस्तिका उपलब्ध है लेकिन किट के भीतर फेस मास्क, दवाइयों और निर्देशिका पुस्तिका ही मिल रही है। मरीजों का आरोप है कि किट में पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर, जैवचिकित्सकीय थैला और सैनिटाइजर नहीं मिल रहा है। इस कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिले में अधिक संख्या में संक्रमित आ रहे हैं। उनकी जांच की जिम्मेदारी आशा कार्यकर्ताओं को दी गई है। आइसोलेशन किट में दर्ज पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर गांव की आशा कार्यकर्ताओं को दिया गया है। रोजाना मरीजों का तापमान और ऑक्सीजन स्तर जांच कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है।
- डॉ. बीडी जोशी, सीएमओ, बागेश्वर।