गरुड़ (बागेश्वर)। तहसील क्षेत्र के गांवों में ग्रामीण रात को गांव की चौपाल में बैठकी होली का आयोजन कर रहे हैं। होली के मद्देनजर स्थानीय दुकानदारों ने अपने प्रतिष्ठान रंग, गुलाल और होली के परिधानों से सजा दिए हैं। तहसील क्षेत्र के भेंटा, सिल्ली, पाये, नरग्वाड़ी, तिलसारी, आगर मटे, चनोली, कज्यूली, अयारतोली, धैना, बंड, जिनखोला, मवई, दर्शानी, गढ़सेर, जिनखोला, मटेना रतमटिया, कौलांग, लौबांज आदि गांवों रात के समय गांव की चौपालों में बैठकी होली का आयोजन हो रहा है।
देवनाई घाटी के चौपालों में 40 साल से नहीं हो रहा होली गायन
गरुड़ (बागेश्वर)। होली के लिए सुविख्यात देवनाई घाटी के चौपालों में 40 साल से होली गायन नहीं हो रहा है। हालाकि गांव के बच्चे गांव के मंदिरों में होली के गीत गाते हैं।
होली के सुविख्यात देवनाई घाटी के देवनाई, कफलढूंगा, बंतोली, भतेड़िया, सरोली, भिटारकोट, सिंपुर, पोखरी, भगरतोला हरबगड़ आदि गांवों के चौपालों में वर्ष 1,983 तक गांव के होल्यार होली गाते थे। होली की चतुर्दशी के दिन देवनाई घाटी के सभी गांवों के होली एक दर्जन अधिक ध्वजाओं और बाजे-गाजों के साथ होली गाते कोट भ्रामरी मंदिर जाते थे। तब कानूून व्यवस्था राजस्व पुलिस देखती थी। उसके पास संसाधनों की कमी के कारण कानून व्यवस्था कमजोर थी। होली के हुड़दंग से बचने के लिए देवनाई घाटी के ग्रामीणों ने चतुर्दशी के दिन कोट मंदिर जाने और अपने गांव के चौपालों में होली गायन बंद कर दिया। हालांकि घाटी के ग्रामीण घरों में होली अवश्य खेलते हैं।