हाईमास्ट लाइट का प्रयोग प्रकाश व्यवस्था के लिए किया जाता है लेकिन बागेश्वर में इसका प्रयोग तेंदुओं को आबादी क्षेत्र में आने से रोकने के लिए भी किया जाएगा। जिले के आबादी क्षेत्रों में तेंदुओं की दहशत इस कदर बढ़ गई है कि जिला प्रशासन को तेंदुए के खतरे को कम करने के लिए यह उपाय सूझा है।
बागेश्वर की डीएम अनुराधा पाल ने आबादी क्षेत्र में तेंदुओं के खतरे को कम करने के लिए तेंदुआ प्रभावित क्षेत्रों में आपदा विमोचन निधि से हाईमास्ट लाइट लगाने का फैसला लिया है। इसके लिए सर्वे का काम भी शुरू हो गया है। यदि ऐसा होता है तो बागेश्वर उत्तराखंड का ऐसा पहला जिला होगा जहां तेंदुए का खतरा कम करने के लिए हाईमास्ट लाइट का सहारा लिया जाएगा।
हाल के वर्षों में नगरीय क्षेत्र में भी तेंदुओं की आमद बढ़ी है। पालतू मवेशियों को तेंदुए शिकार बना रहे हैं। इन दिनों जिला मुख्यालय के साथ ही जिले के अन्य इलाकों में तेंदुए की लगातार दहशत बनी हुई है।
तेंदुए के हमल
- दो साल पहले बागेश्वर नगर के सैंज क्षेत्र में तेंदुआ आवासीय मकान में घुस गया था।
- नगर के ठाकुरद्वारा, मजियाखेत, मेहनरबूंगा क्षेत्र के साथ ही आरे, काफलीगैर, गरुड़ क्षेत्र में तेंदुए लगातार दिखाई दे रहे हैं।
- दो महीने पहले काफलीगैर क्षेत्र में एक युवती पर तेंदुए ने हमला कर दिया था।
- पिछले साल नगर के कठायतबाड़ा वार्ड में एक बच्चे को तेंदुए ने जख्मी कर दिया था।
डीएफओ से मांगी रिपोर्ट
डीएम अनुराधा पाल ने बताया कि तेंदुआ संभावित क्षेत्र में हाईमास्ट लाइट लगाने के लिए डीएफओ से रिपोर्ट मांगी है ताकि हाईमास्ट लाइट लगाई जा सके।