बागेश्वर। अपनी कमजोरी को ताकत बनाकर हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है। इस बात को काफलीगैर की मंजू नगरकोटी ने साकार कर दिखाया है। जन्म से दृष्टिहीन मंजू ने शिक्षा के ज्ञान से बंद आंखों के अंधेरे को न सिर्फ मात दी बल्कि शिक्षिका बनकर वह बच्चों के भविष्य को संवारने का काम भी कर रही हैं। जिला रेडक्रॉस समिति ने उन्हें दिव्यांगों के लिए प्रेरणास्रोत मानते हुए सम्मानित किया।
मंजू के पिता किसान और माता पुष्पा देवी गृहिणी हैं। जन्म से दृष्टिहीन होने के बावजूद मंजू ने खुद को दूसरों से अलग नहीं समझा। उन्होंने राप्रावि काफलीगैर से प्राथमिक शिक्षा हासिल की। हल्द्वानी के नवाजखेड़ा से जूनियर और राबाइंका से माध्यमिक शिक्षा प्राप्त की।
इस दौरान वह नेशनल एसोसिएशन फॉर ब्लाइंड की ओर से संचालित छात्रावास में निशुल्क रहती थीं।
शिक्षा हासिल करने के बाद सितंबर 2024 में उन्हें शिक्षा विभाग में सेवा शुरू करने का मौका मिला। वर्तमान में वह राजकीय प्राथमिक विद्यालय सितारगंज-दो में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत हैं। मंजू अपने माता-पिता और दिव्यांग पुनर्वास केंद्र बागेश्वर में कार्यरत मोहिनी कोरंगा को अपना प्रेरणास्रोत मानती हैं।
बुधवार को रेडक्राॅस भवन में चेयरमैन इंद्र सिंह फर्स्वाण, जिला सचिव आलोक पांडेय, कोषाध्यक्ष जगदीश उपाध्याय, वेद प्रकाश पांडेय आदि ने उन्हें शॉल और प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।