बागेश्वर। जिले के अस्पतालों में ईएनटी और मनोचिकित्सक नहीं होने से मरीजों और दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाने वालों की परेशानी बढ़ गई है। मरीजों को इलाज कराने जबकि दिव्यांगों को प्रमाणपत्र बनवाने संबंधी जांच के लिए बाहरी जिलों की दौड़ लगानी पड़ रही है।
जिला अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ का अनुबंध समाप्त होने के बाद नए चिकित्सक की नियुक्ति नहीं पाई है। जिला अस्पताल में कान, नाक और गले से संबंधित मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मनोचिकित्सक नहीं होने से मानसिक रोगियों को भी जिले में इलाज नहीं मिल पा रहा है। जिले में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र के माध्यम से प्रमाणपत्र बनाने के लिए पहुंचने वाले दिव्यांगों को भी चिकित्सकों की कमी से दिक्कतें आ रही हैं।
दिव्यांगों को चिकित्सकीय प्रमाणपत्र बनाने के लिए के लिए अल्मोड़ा या हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ रही है। जिले में ईनटी सर्जन नहीं होने से नौ और मनोचिकित्सक नहीं होने से 16 दिव्यांगों के प्रमाणपत्र लंबित हैं।