कपकोट (बागेश्वर)। जंगलों की आग आबादी तक पहुंचने के साथ-साथ लोगों के लिए खतरा बनने लगी है। कपकोट के चीराबगड़ निवासी महिला वनाग्नि की चपेट में आकर झुलस गई। वह अपने घर के समीप तक पहुंची आग से घास के ढेरों को बचाने का प्रयास कर रही थी। प्रभावित ने वन विभाग से मुआवजा देने की मांग की है।
बृहस्पतिवार की रात चीराबगड़ के जंगल में लगी आग तेजी से फैलते हुए आबादी की तरफ फैलने लगी। आग गांव की नीमा देवी पत्नी प्रताप सिंह के घर से कुछ दूरी पर रखे घास के ढेर तक पहुंच गई। महिला घास के ढेर को बचाने के लिए दौड़ी और पेड़ों की टहनियों से आग को बुझाने का प्रयास करने लगी। उस समय हवा चल रही थी, महिला आग की तेज लपटों की चपेट में आ गई। हालांकि तब तक वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और आग बुझाने लगी। महिला को तत्काल अस्पताल ले जाया गया। जहां प्राथमिक उपचार के बाद महिला को छुट्टी दे दी गई। वहीं प्रभावित महिला ने वन विभाग से मुआवजा देने की मांग की है।
इधर, रेंजर विजय मेलकानी ने बताया कि महिला आग बुझाते समय तेज लपट से झुलस गई थी। हालांकि समय रहते वह संभल गई और उन्हें अधिक नुकसान नहीं हुआ। वनाग्नि की घटना में आपदा प्रबंधन की ओर से मुआवजा देने का प्रावधान है। महिला के झुलसने की सूचना क्षेत्रीय पटवारी को दे दी गई है। पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर ही महिला को मुआवजा दिया जाएगा।
2020 में जंगल की आग से दो महिलाओं की गई थी जान
बागेश्वर। वनाग्नि जिले में विकराल रूप धारण करती जा रही है। आबादी क्षेत्र तक आग पहुंच रही है। वन विभाग असहाय नजर आ रहा है। मंगलवार को कपकोट के नामतीचेटाबगड़ ग्राम पंचायत में जंगल की आग से पांच लोगों के मकान जल गए थे। फिलहाल आग की चपेट में कोई नहीं आया। 4 अप्रैल 2020 को कपकोट के पुड़कुनी के जंगल में लगी आग की चपेट में आने से चचई गांव की दो महिलाएं जिंदा जल गईं थीं। एक महिला ने भागकर जान बचाई थी। संवाद
बागेश्वर में 131 हेक्टेयर जंगल चढ़ा वनाग्नि की भेंट
बागेश्वर/कपकोट। जिले में वनाग्नि की घटनाओं में लगातार इजाफा हो रहा है। जिला मुख्यालय सहित सभी तहसील क्षेत्रों तक जंगल की आग पहुंच गई है। अब तक 131 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुका है। फायर सीजन शुरू होने के बाद वनाग्नि की 92 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं और 4.32 लाख रुपये का नुकसान हो गया है।
बृहस्पतिवार की रात को कपकोट के चीराबगड़ क्षेत्र के जंगलों में आग लगी। देर शाम जंगल अचानक धधकने लगा। आग आबादी के समीप तक पहुंच गई। लोगों ने वन विभाग को सूचित किया और खुद भी आग बुझाने का प्रयास करने लगे। सूचना मिलने पर विभाग के कर्मचारी भी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से आग को काबू किया। इस दौरान जंगल का एक बड़ा हिस्सा आग की चपेट में आ चुका था। वहीं जिले में लगातार हो रही वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हिंसक जानवर गांवों का रुख करने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी तापमान बढ़ रहा है। धुुआं फैलने से बीमारियों में इजाफा हो रहा है। चारा पत्ती नष्ट होने से पशुपालक भी परेशान हैं। ग्रामीणों ने विभाग से वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय करने की मांग की है।
कई स्थानों पर अराजक तत्व वनों को आग के हवाले कर रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारी और फायर वॉचर लगातार जंगलों की आग बुझाकर नुकसान को बचा रहे हैं। ग्रामीणों को वनाग्नि सुरक्षा के लिए जागरूक भी किया जा रहा है। आग लगाने वालों पर नजर रखी जा रही है। पकड़े जाने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। विभाग लगातार लोगों से वनों को बचाने में सहयोग करने की अपील कर रहा है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर
आग लगाने की सूचना देने वालों को मिलेगा 10 हजार का ईनाम
बागेश्वर। डीएम विनीत कुमार ने वनों को आग लगाने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। उन्होंने आग लगाने वाले की सूचना देने वाले को 10 हजार रुपया ईनाम देने का एलान किया और उसकी पहचान भी गुप्त रखने की बात कही है।
जिला कार्यालय सभागार में डीएम में हुई वनाग्नि नियंत्रण की समीक्षा बैठक लेते हुए डीएम ने कहा कि आग की घटनाओं से काफी नुकसान हो रहा है। आग बुझाने के उपकरणों की कमी होने पर मांग करने, वनाग्नि की घटनाओं को रोकने के लिए एसडीआरएफ और जरुरत पड़ने पर सेना की मदद लेने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को अपने अधीनस्थों को वनाग्नि नियंत्रण में सहयोग करने और अराजक तत्वों की सूचना देने के लिए निर्देश देने को कहा। डीएफओ हिमांशु बागरी ने कहा कि अब तक जिले में आग लगाते हुए सात लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्होंने सभी विभागों से वनाग्नि नियंत्रण में सहयोग करने की अपील की। बैठक में वृक्ष पुरुष किशन सिंह मलड़ा, एसपी अमित श्रीवास्तव, डीडीओ संगीता आर्या सहित विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।
दो महीने तक नहीं मिलेगी छुट्टी
बागेश्वर। डीएम ने स्वास्थ्य विभाग से अगले दो महीने तक अपरिहार्य कारणों को छोड़कर किसी भी स्टॉफ को अवकाश नहीं देने को कहा। जिले में पर्याप्त मात्रा में दवाइयों का स्टॉक रखने के भी निर्देश दिए।
अंधड़ से बैजनाथ और गढ़खेत के जंगल पिरुल से लदे
गरुड़ (बागेश्वर)। अंधड़ और तपिश बढ़ने से बागेश्वर वन प्रभाग के बैजनाथ और गढ़खेत रेंज के जंगल फिर पिरुल से पट गए हैं।
हालांकि वन विभाग ने कुछ कर्मचारी आबादी की ओर गिरे पिरुल को हटाने में लगाए हैं। ग्रामीणों ने आबादी में पहुंचे पिरुल को फिलहाल हटा दिया है। वन रेंजर हरीश खर्कवाल ने बताया कि तीन दिन में अंधड़ आने से जंगलों में काफी मात्रा में पिरुल गिरा है। उन्होंने ग्रामीणों से जंगलों में धूम्रपान किसी भी हालत में न करने को कहा है। उन्होंने ग्रामीणों से आबादी में गिरे पिरुल को हटाने को कहा है।
कपकोट के चीराबगड़ गांव के जंगल में लगी आग। विज्ञप्ति- फोटो : BAGESHWAR