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देर रात तक धधकता रहा कुकुड़ामाई का जंगल

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अल्मोड़ा के चितई जंगल में लगी आग। - फोटो : ALMORA
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अल्मोड़ा। गर्मी के मौसम में जिले में लगातार वनाग्नि की घटनाएं बढ़ रही है। सोमवार को भी जिले में पांच स्थानों पर सुबह से शाम तक जंगल धधकते रहे। सभी स्थानों पर वन विभाग, दमकल विभाग और स्थानीय लोग आग बुझाने में जुटे रहे।
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सोमवार को मोहान रेंज, सोमेश्वर वन क्षेत्र, जौरासी वन क्षेत्र, रानीखेत वन क्षेत्र और अल्मोड़ा वन क्षेत्र के जंगलों में आग लगी। अल्मोड़ा में तीन स्थानों पर और जौरासी रेंज में दो स्थानों पर जंगल जले। मोहान रेंज में सुबह नौ, सोमेश्वर रेंज में सुबह साढ़े नौ बजे, जौरासी रेंज में 11 बजे, रानीखेत और अल्मोड़ा वन क्षेत्र में दोपहर 12 बजे से वनाग्नि शुरू हुई जो देर शाम तक लगी रही। आग लगने से सभी स्थानों पर वन संपदा जलने से नुकसान हुआ। द्वाराहाट क्षेत्र के बग्वालीपोखर स्थित ग्राम भेट में जंगल की आग गांव में रहने वाली नीरू भट्ट के घर तक पहुंच गई। नीरू ने स्थानीय पुलिस को मामले की सूचना दी। सूचना पर एसआई निखिलेश भट्ट अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों की मदद से आग को नीरू के घर तक आने से रोका। जिससे नीरू का घर आग की चपेट में आने से बच गया।
देर रात तक धधकता रहा कुकुड़ामाई का जंगल
वन विभाग की टीम ने आधी रात को बुझाई आग, जिले में वनाग्नि की घटनाएं बढ़कर हुई 67
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। जिले में वनाग्नि की घटनाओं का आंकड़ा रोजाना बढ़ते जा रहा है। फायर सीजन के बाद से जिले में वनाग्नि की 67 घटनाओं में 91.50 हेक्टेयर जंगल जल गया है। आग से करीब 2.80 लाख रुपये के नुकसान का अनुुमान है। रविवार की रात को जिला मुख्यालय के समीपवर्ती कुकुड़ामाई के जंगल में आग लगी। आधी रात तक जंगल धधकता रहा। वन विभाग के कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग को काबू किया।
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तापमान में बढ़ोतरी के साथ-साथ जिले में आग की घटनाओं में भी इजाफा होता जा रहा है। जिला मुख्यालय से लेकर सभी तहसीलों के जंगल धधक रहे हैं। आग की घटनाओं में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के कारण गांव से लेकर नगर क्षेत्र तक लोगों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। नगर में धुआं फिर से फैलने लगा है। आग से चारा पत्ती को नुकसान होने के कारण ग्रामीण पशुपालकों के सामने चारे का संकट पैदा हो रहा है। आग की घटनाओं में इजाफा होने से वन विभाग की परेशानी भी बढ़ती जा रही है। मॉडल क्रू स्टेशन सहित 29 अन्य क्रू स्टेशनों में तैनात कर्मचारी भी वनों को जलने से नहीं बचा पा रहे हैं। कहने को विभाग वनाग्नि सुरक्षा के तहत व्यापक प्रचार-प्रसार कर रहा है। वन पंचायत सरपंचों को भी वनाग्नि सुरक्षा अभियान में शामिल किया गया है, बावजूद इसके धरातल पर इसका असर नहीं दिख रहा है। जंगल की आग का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
इधर, रेंजर श्याम सिंह करायत ने कहा कि कुकुड़ामाई-आरे के जंगल में रात के समय आग लगने की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई थी। हालांकि तब तक आग काफी तेज हो गई थी। कर्मचारियों ने देर रात तक कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
लाइन में शॉर्ट सर्किट से भी जल रहे जंगल
बागेश्वर। जिले में वनाग्नि की घटनाओं का एक कारण जंगलों से गुजर रही बिजली की लाइनें भी बन रही हैं। वन विभाग ने बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट के कारण पांच वनाग्नि की घटनाएं होने का दावा किया है। अधिकांश घटनाओं में बिजली की हाइटेंशन लाइन के झूलते हुए तारों को जिम्मेदार माना जा रहा है।
फायर सीजन में जंगलों के जलने के लिए अराजक तत्वों का आग लगाना, लोगों की लापरवाही और झाड़ियों या कचरे को आग के हवाले करना माना जाता था, लेकिन इस कड़ी में अब बिजली लाइनों से आग लगने की घटनाएं भी सामने आनी लगी है। इस फायर सीजन में शॉर्ट सर्किट से नीलेश्वर की पहाड़ी, नीलेश्वर मंदिर के पास, आरे, द्वारसों और नदीगांव के डिगरा वन पंचायत में आग लग चुकी है। रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि अधिकांश स्थानों पर तार झूल रहे हैं। हवा चलते ही तार आपस में टकराते हैं, जिनसे निकलने वाली चिंगारी पिरुल के संपर्क में आते ही आग भड़क उठती है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर विभाग के पार पेड़ों से बांधे गए हैं और कहीं पेड़ों को छूकर निकल रहे हैं। ऊर्जा निगम को शॉर्ट सर्किट से हुई घटनाओं की जानकारी फोन के माध्यम से कई बार दी जा चुकी है। वन विभाग इस समस्या को लेकर पत्र भी भेज रहा है। कहा कि अगर ऊर्जा निगम सहयोग करे तो वनाग्नि की कई घटनाओं को रोका जा सकेगा।
इधर, ऊर्जा निगम के ईई विवेक कांडपाल ने कहा कि उनके पास शॉर्ट सर्किट से जंगलों के जलने की कोई जानकारी नहीं है। हालांकि विभाग की ओर से झूलते तारों की मरम्मत और तारों को छू रहे पेड़ों की लॉपिंग का काम कराया जा रहा है।
धू-धू कर जला पन्याली का जंगल
रानीखेत (अल्मोड़ा)। तपन बढ़ने के साथ ही जंगलों में आग लगने का सिलसिला भी तेज होने लगा है। रविवार की रात पन्याली क्षेत्र के जंगलों में भयंकर आग लग गई। आग की लपटें इतनी भयानक थी कि आसपास के घरों तक पहुंचने लगी। देखते ही देखते आग ने आरक्षित वन क्षेत्र के अलावा वन पंचायत और राजस्व क्षेत्र के जंगलों को भी खाक कर दिया। आग लगने का कारण सड़क किनारे कूड़ा जलाना बताया जा रहा है।
इस बार पहाड़ भी गर्मी से तपने लगे हैं। पन्याली का जंगल धू-धू कर जल गया। रविवार की रात अचानक लगी आग ने डेढ़ हेक्टेयर क्षेत्र आरक्षित वन को खाक कर दिया, इसके अलावा राजस्व और वन पंचायत का बड़ा हिस्सा आग की भेंट चढ़ गया। द्वाराहाट क्षेत्र के जंगलों में भी बेतहाशा आग लगी रही। हालांकि वनाग्नि काल से पूर्व विभाग के आग बुझाने के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं दिखाई देता। पन्याली क्षेत्र के बड़े हिस्से को आग ने तबाह कर दिया, लेकिन इसे बुझाने के लिए कोई नहीं पहुंचा। हवा के साथ रात के समय आग तेजी से फैल गई। जिस पर काबू पाना मुश्किल हो गया था। इधर, विभागीय अधिकारियों का कहना है कि वनाग्निकाल से पहले ही स्थानीय लोगों को आग बुझाने के लिए जागरूक कर दिया जाता है, लेकिन आग बुझाने के लिए उपकरण उन्हें कौन उपलब्ध कराएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
वन पंचायत के जंगलों की आग पन्याली आरक्षित वन क्षेत्र में भी पहुंच गई। सूचना मिलने के बाद विभागीय टीम वहां गई थी। लगभग डेढ़ हेक्टेयर जंगल खाक हो गया है। वन पंचायत का बड़ा हिस्सा जल गया है। -हरीश टम्टा, वन क्षेत्राधिकारी, रानीखेत।

पन्याली के जंगल में धधकी आग।संवाद- फोटो : RANIKHET

बागेश्वर के कुकुड़ामाई के जंगल में लगी आग। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : BAGESHWAR

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