यहां सरयू नदी का ऐतिहासिक झूला पुल 102 साल का हो गया है। बागेश्वर के इस सबसे पुराने पुल का निर्माण ब्रिटिश भारतीय शासकों ने कराया था।
बड़े और आधुनिक मोटर पुलों के इस दौर में बागेश्वर में सरयू के ऊपर से गुजरना रोमांचकारी लगता है। चलने पर पुल झूले की तरह लहराता है, नवागंतुकों और बाहरी लोगों के लिए यह कौतूहल भरा होता है।
धार्मिक मान्यताओं के कारण बागेश्वर सदियों से मानवीय गतिविधियों का केंद्र रहा है। मेलों आदि सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए दूरदराज से भी लोग यहां आते हैं। बारिश के मौसम में नदियों का जलस्तर काफी बढ़ जाता है। पहले लोग स्वयं लकड़ी, पत्थर जोड़कर अस्थायी पुलों का निर्माण करते थे।
1913 में ब्रिटिश सरकार ने सरयू पर पहले झूला पुल का निर्माण किया। बाद में अन्य मोटर पुलों का निर्माण हुआ। क्षेत्रवासियों की पांचवीं पीढ़ी इस वक्त इस पुल का उपयोग कर रही है।
संस्कृति, सभ्यता, धर्म, इतिहास, राजनीति की कई अहम यादें बागेश्वर के अन्य प्रमुख स्थलों की तरह इस पुल के साथ भी जुड़ी हैं। इस विरासत को बचाना हर दृष्टि से लाजमी है।
सामाजिक कार्यकर्ता, नगर पालिका के पूर्व सभासद भुवन चंद्र कांडपाल का कहना है कि इस विरासत को बचाने के लिए समय-समय पर मरम्मत की जानी चाहिए।