बागेश्वर। दो दिन बाद यानि कि 15 सितंबर को बागेश्वर जिला 26 वर्ष पूरे कर लेगा। वर्ष 1997 में अस्तित्व में आए बागेश्वर जिले ने बहुत कुछ पाया है काफी कुछ पाना शेष है। जिला भरपूर यौवन में भी समस्याओं के मकड़जाल में फंसा है।
15 सितंबर 1997 को अल्मोड़ा जिले से अलग होकर बागेश्वर जिला अस्तित्व में आया। धीरे-धीरे जिले में सुविधाओं का विकास हुआ। जिला मुख्यालय का ढांचा अस्तित्व में आया। इन 26 वर्षों में विकास के काम भी हुए लेकिन जिस तेजी से जिला मुख्यालय और जिले के अन्य हिस्सों में विकास कार्य आगे बढ़ने चाहिए थे उस तेजी के साथ नहीं हो पाया। आज जिले के दाबू, हड़ाप, कुंवारी समेत कई इलाके यातायात सुविधा से वंचित हैं।
26 वर्ष की उपलब्धि और समस्याओं की बात जिला मुख्यालय से करें तो जिला गठन के 26 साल बीतने के बाद भी सदानीरा सरयू और गोमती नदी के तट पर बसी बागेश्वर नगरी में रहने वाले लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। करीब 30 हजार आबादी वाले जिला मुख्यालय में 2.5 एमएलडी पानी की कमी है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की दिशा में नहीं हो पाया काम
बागेश्वर। जिला मुख्यालय में आज तक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की बात जिला मुख्यालय के लोग चुनाव में नेताओं के मुंह से सुनते हैं। सरकार की ओर से बात घोषणा से आगे नहीं बढ़ती। वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण की घोषणा की। प्रस्ताव तैयार किया गया लेकिन प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली। बीते चार सितंबर को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की घोषणा की। अब तक प्लांट स्थापित होने की दिशा में काम आगे नहीं बढ़ा है। संवाद
सीएचसी भवन में चल रहा जिला अस्पताल
बागेश्वर। जिला गठन के सात साल बाद यानि कि वर्ष 2004 में बागेश्वर का जिला अस्पताल अस्तित्व में आया। सीएचसी के भवन में जिला अस्पताल का संचालन किया गया। उम्मीद थी कि जल्द जिला अस्पताल को अपना परिसर मिलेगा लेकिन जिले के लोगों का यह सपना जिला गठन के 26वें साल में भी पूरा नहीं हो पाया है।
खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम तक नहीं
बागेश्वर। बागेश्वर जिले से ताल्लुक रखने वाले भारतीय फुटबॉल टीम के सितारे रोहित दानू, क्रिकेटर मनीष पांडेय, कमलेश नगरकोटी के गृह क्षेत्र में खिलाड़ियों को एक अदद खेल स्टेडियम तक नहीं मिल पाया है। खिलाड़ी और खेल विभाग खेल गतिविधियों के लिए डिग्री कॉलेज के खेल मैदान पर निर्भर है। संवाद