बागेश्वर। काफलीगैर तहसील का धूराफाट क्षेत्र एक महीने से पेयजल संकट का सामना कर रहा है। क्षेत्र के करीब 12 गांवों की 5000 से अधिक की आबादी प्राकृतिक जलस्रोतों और हैंडपंपों के सहारे पीने के पानी का इंतजाम कर रही है। सरयू नदी का जलस्तर कम होने से पंप में आई खराबी से लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।
धूराफाट के बोहाला, असों, पाना, सिया, रैखोली, नंदीगांव, बौड़ी, एरियागाड़, चनबौड़ी, घटगाड़ आदि गांवों में सरयू नदी से बनी धूराफाट पंपिंग पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति की जाती है। सरयू नदी का जलस्तर गिरने से पंप हाउस तक पानी नहीं पहुंच रहा है। लोकसभा चुनाव से पूर्व जल संस्थान ने नदी में कट्टे लगाकर बहाव को पंप हाउस की तरफ मोड़ने का प्रयास किया लेकिन वह पर्याप्त नहीं रहा। फिलहाल विभाग ने नदी में जेसीबी मशीन लगाने की अनुमति मांगी है। जलस्तर में गिरावट के साथ-साथ पंप में खराबी आने के कारण भी नदी का पानी नहीं चढ़ रहा है।
ग्राम प्रधान पाना, गोपाल सिंह मेहता ने कहा कि हर साल गर्मी आते ही लोगों को पेयजल किल्लत झेलनी पड़ती है। पुरानी लाइन और मशीनरी को मरम्मत की दरकार है। विभाग को समस्या का स्थायी समाधान खोजना होगा।
ग्रामीण, बोहाला, चंद्र सिंह रावत ने बताया कि कई साल से क्षेत्रवासी पेयजल संकट झेल रहे हैं। गर्मी के दिनों में खेतीबाड़ी का काम अधिक रहता है, इन्हीं दिनों नल सूख जाते हैं। पानी जुटाने के लिए दिन-रात एक करना पड़ता है।
अध्यक्ष जन संघर्ष समिति, कठपुड़ियाछीना, नरेंद्र सिंह रावत ने कहा कि क्षेत्र की एकमात्र पेयजल योजना लोगों को पर्याप्त पानी मुहैया नहीं करा पा रही है। कभी पंप में खराबी, कभी पाइप लाइनों में लीकेज तो कभी नदी का गिरता जलस्तर पेयजल संकट का कारण बन रहा है। समस्या के स्थायी निदान के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
ईई जल संस्थान बागेश्वर, सीएस देवड़ी ने कहा कि नदी के पानी को पंप हाउस की ओर मैन्युअली डायवर्ट किया गया है। मशीन लगाने के लिए अनुमति मांगी गई है। खराब पंप को मरम्मत के लिए भेजा गया है। एक सप्ताह के भीतर पंप की समस्या दूर हो जाएगी।