बागेश्वर। उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में तबादला प्रक्रिया में विसंगतियों और व्यवस्था की उपेक्षा से व्यथित होकर राजकीय इंटर कॉलेज भंतोला में तैनात सहायक अध्यापक अंग्रेजी धर्म सिंह ने अनोखा विरोध शुरू किया है। दुर्गम क्षेत्र में 21 वर्षों से लगातार सेवाएं दे रहे शिक्षक ने विद्यालय अवधि के बाद दोपहर दो बजे से शाम छह बजे तक मुंह पर काली पट्टी बांधकर और काले कपड़े पहनकर मौनव्रत और उपवास शुरू कर दिया है।
शिक्षक धर्म सिंह ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजे प्रत्यावेदन में अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि वह अपने गृह क्षेत्र से करीब 330 किलोमीटर दूर जीआईसी भंतोला में वर्ष 2005 से कार्यरत हैं। उनकी पत्नी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं और एमआरआई रिपोर्ट के अनुसार चिकित्सकों ने रीढ़ की हड्डी की सर्जरी की सलाह दी है। इसके बावजूद वर्ष 2026 की तबादला प्रक्रिया में उन्हें स्थानांतरण का अवसर नहीं दिया गया। शिक्षक धर्म सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से विद्यालय में प्रभारी प्रधानाचार्य का दायित्व भी संभाल रहे हैं। उनके शिक्षण काल में विद्यालय का हाईस्कूल बोर्ड परीक्षाफल विगत 10 वर्षों में शत-प्रतिशत और बेहतरीन रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय की शरण लेने को मजबूर होंगे।
धर्म सिंह ने उठाए सवाल
10 वर्ष से अधिक दुर्गम में सेवा देने वाले शिक्षकों के चक्रीय तबादले का नियम कहां गया।
क्या सामान्य श्रेणी के शिक्षकों को गंभीर परिस्थिति में भी परिवार के साथ रहने का अधिकार नहीं है।
प्रभारी सीईओ, आशाराम ने बताया कि शिक्षक के संबंध में पूर्व में प्रत्यावेदन शासन को भेजा गया है। माध्यमिक स्तर पर तबादले निदेशालय सतर से ही होते हैं। मामले के बारे में फिर से निदेशालय के अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।