बागेश्वर-टनकपुर रेल लाइन निर्माण की मांग को लेकर संघर्ष समिति ने प्रदर्शन किया। समिति सदस्यों ने कहा कि प्रस्तावित रेल लाइन के सामरिक महत्व की होने के बावजूद सरकार इसकी उपेक्षा कर रही है।
रविवार को रेल लाइन संघर्ष समिति के सदस्यों की तहसील परिसर में बैठक हुई। वक्ताओं ने कहा कि आजादी से पहले टनकपुर से बागेश्वर के लिए रेल लाइन का सर्वे हो चुका था। इस रेल लाइन के निर्माण से कुमाऊं के चारों पर्वतीय जिलों के लोगों को बेहतर यातायात की सुविधा मिलती।
पहाड़ से होने वाला पलायन भी काफी हद तक रुकता। साथ ही यह रेल लाइन सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण होती। रेल लाइन के महत्व के बावजूद केंद्र सरकार की ओर से इसके निर्माण के लिए बजट आवंटित नहीं किया।
कहा कि जब तक रेल लाइन का निर्माण शुरू नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा। बाद में समिति सदस्यों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया। समिति की अध्यक्ष नीमा दफौटी और महामंत्री खड़क राम आर्या ने अगली बैठक 12 अगस्त को करने का निर्णय लिया।
बैठक और प्रदर्शन करने वालों में हयात सिंह मेहता, गिरीश पाठक, मोहन जोशी, केशवानंद जोशी, केवल सिंह, नर सिंह, सोबन सिंह, खीम सिंह, कमलजीत नारायण, गीता देवी, लक्ष्मी, मालती, गीता, हेमा जोशी, ललिता, मंजू, सरस्वती आदि थे।