चलकाना गांव निवासी धीरज गड़िया के खिलाफ युवाओं को नौकरी के नाम पर नकली नियुक्ति पत्र देने के आरोप की पुष्टि हो गई है। छह माह से फरार चल रहे धीरज की संपत्ति कुर्क करने का आदेश पुलिस ने न्यायालय से प्राप्त कर लिया है। कुर्की का आदेश शनिवार को उसके घर पर चस्पा कर दिया गया।
यह मामला छह माह पुराना है।
कपकोट के चलकाना निवासी धीरज गड़िया ने 12 बेरोजगार युवाओं से सरकारी नौकरी के नाम पर सौदेबाजी की। उसने तीन युवाओं से 50-50 हजार रुपये एडवांस ले लिए थे। उसने कुछ युवकों को शासन के प्रमुख सचिव ओमकुमार और अपर सचिव अतर सिंह के नाम से नियुक्ति पत्र भी दिए। इसके लिए बेरोजगारों को यहां एक होटल में बुलाया गया।
उसकी नीयत पर शक होने पर युवाओं ने कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी, लेकिन पुलिस के आने तक धीरज वहां से भाग गया। बाद में पीड़ितों ने फर्जी नियुक्ति पत्र पुलिस को मुहैया कराए। रवाईखाल निवासी गिरीश लाल, अशोक कुमार, पूजा आर्या आदि ने यहां कोतवाली में एफआई दर्ज कराई। पुलिस इस बीच मामले की छानबीन में लगी रही।
वरिष्ठ उपनिरीक्षक सच्चिदानंद को मामले की जांच सौंपी गई। उन्होंने देहरादून जाकर सचिवों से संपर्क किया, उनके नाम से धीरज द्वारा जारी नियुक्ति पत्र दिखाए। दस्तावेजों के पूरी तरह नकली होने की पुष्टि होने पर पुलिस में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से फरार अभियुक्त की संपत्ति कुर्क करने की अनुमति मांगी। अदालत के आदेश पर कोतवाली पुलिस ने इसकी तैयारी कर ली है।
एसएसआई सच्चिदानंद शनिवार को चलकाना गांव गए, जहां उन्होंने धीरज के घर पर कुर्की का नोटिस चस्पा किया। वरिष्ठ उपनिरीक्षक प्रतिमा भट्ट ने बताया कि अभियुक्त को एक माह का समय दिया गया है, इस बीच वह हाजिर नहीं हुआ तो उसके नाम की संपत्ति को कुर्क कर लिया जाएगा।