बागेश्वर/कपकोट। जिले के हिमालयी क्षेत्र के गांव कीमू में भालू ने हमला कर महिला को गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। जान बचाने के लिए महिला ने भालू के साथ संघर्ष किया। गांव के लोगों के शोर मचाने के बाद भालू जंगल में भाग गया। महिला को कपकोट सीएचसी में प्राथमिक इलाज के बाद जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है। कीमू जिले का अंतिम गांव है। वहां से सड़क तक आने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। जंगली जानवरों के आतंक से गांव के लोगों में रोष है।
मंगलवार शाम करीब सात बजे कीमू निवासी धनुली देवी (42) पत्नी स्वर्गीय दान सिंह मकान के ही पास जानवरों के लिए चारा काट रही थी। इस दौरान जंगल से आए भालू ने महिला पर हमला कर दिया। भालू उसके शरीर को नोचने लगा। महिला ने हाथ में पकड़ी दरांती से भालू पर हमला किया लेकिन वह भालू का सामना करने में असमर्थ रही। महिला के चिल्लाने पर गांव के अन्य लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। लोगों के शोर मचाने पर भालू जंगल में भाग गया। भालू ने महिला को बुरी तरह से जख्मी कर दिया था। भालू ने उसके दोनों पैरों में नाखून और दांतों से घाव कर दिए। चेहरे पर भी कई घाव कर दिए।
गांव के लोग गंभीर रूप से जख्मी महिला को डोली से पांच किमी दूर गोगिना तक लाए। भालू के हमले की सूचना मिलने पर विधायक सुरेश गढ़िया ने कपकोट के एसडीएम पारितोष वर्मा से बात कर एंबुलेंस भिजवाई। महिला को एंबुलेंस से कपकोट सीएचसी लाया गया। प्राथमिक इलाज के बाद उसे रात में ही जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। महिला के शरीर में कई टांके लगे हैं। उसकी हालत खतरे से बाहर है। महिला की दो बेटियां और एक बेटा है। पति की कई वर्ष पहले मृत्यु हो गई थी। महिला जानवरों को पालकर और खेती कर परिवार का भरण-पोषण करती है।
विधायक सुरेश गढ़िया ने डीएफओ हिमांशु बागरी से बात कर जख्मी महिला के इलाज के लिए आर्थिक मदद देने के साथ ही जंगली भालुओं को आबादी में आने से रोकने के लिए इंतजाम करने को कहा। डीएफओ हिमांशु बागरी ने महिला के इलाज के लिए नियमानुसार मुआवजा दिलाने की बात कही है।
हर समय रहता है खूंखार जानवरों का भय
बागेश्वर। कीमू में भालू के साथ ही सुअर, तेंदुए का खतरा हर समय रहता है। हिमालय से सटा होने और घने जंगलों के पास होने से अक्सर आबादी तक जंगली जानवर पहुंच जाते हैं। इससे पहले भी गांव में जंगली जानवरों के हमले की घटनाएं हुई हैं। गांव के लोगों की मांग है कि जंगली जानवरों का खतरा कम करने के लिए गांव की सरहद पर दीवार लगाने के साथ ही अन्य उपाय किए जाने चाहिए। गोगिना, लीती, शामा में सुविधाजनक अस्पतालों की स्थापना की जानी चाहिए।
कीमू में जंगली जानवरों का भय दिन रात बना रहता है। स्वास्थ्य की कोई व्यवस्था नहीं है। कीमू से गोगिना सड़क तक आने के लिए पांच किमी पैदल चलना पड़ता है। मरीज, घायल लोगों को डोली पर लाना पड़ता है। समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है।
कमला देवी, जख्मी महिला की बहन
कीमू में जंगली जानवरों का भय हर समय लगा रहता है। सुरक्षा के कोई उपाय नहीं हैं। वन विभाग उदासीन रहता है। इसी घटना में भी वन विभाग का रवैया ठीक नहीं रहा। वन कर्मी कपकोट तक साथ आए। वहां से जख्मी धनुली देवी और परिजनों को अकेला छोड़ दिया। न कोई तात्कालिक सहायता दी। प्रकाश रौतेला, जख्मी महिला के भाई
कीमू में जंगली जानवरों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। जंगली जानवर अब घर तक आने लगे हैं। गांव के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। जंगली जानवरों से निजात दिलाने के लिए सरकार, प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।
लीला देवी
कीमू हिमालय से सटा हुआ क्षेत्र है। स्वास्थ्य की कोई सुविधा नहीं है। सीमांत क्षेत्र में सुविधाजनक अस्पताल खोले जाने चाहिए। अस्पताल पहुंचने के लिए 60 किमी की दूरी तय करनी पड़ती है। गोगिना, लीती, शामा में अच्छे अस्पताल होंगे तो लोगों की जान बचाई जा सकती है।
कवींद्र रौतेला, जख्मी महिला का भाई