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भाजपा, कांग्रेस, आप को छोड़कर अन्य प्रत्याशी नहीं छू पाए दो हजार का आंकड़ा

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बागेश्वर में जीत के बाद आरओ से जीत का प्रमाण पत्र लेते विधायक दास। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। विजयी भाजपा, प्रमुख प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस और तीसरे स्थान पर रही आप को छोड़कर अन्य दल और निर्दलीय प्रत्याशी दो हजार का आंकड़ा नहीं छू पाए। बागेश्वर सीट में आठ प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। सपा की लक्ष्मी देवी को 508, निर्दलीय बालकृष्ण को 1512, निर्दलीय दिनेश राम को 798, भैरव नाथ को 1867, बसपा के ओम प्रकाश को 722 मत मिले। सभी दलों को नकारते हुए 874 लोगों ने नोटा का बटन दबाया। कपकोट सीट में छह प्रत्याशी मैदान में थे। कपकोट में बसपा के हरगोविंद जोशी को 486, सपा के हरी राम शास्त्री को 215, निर्दलीय राजेंद्र सिंह को 513 मत मिले। 785 लोगों ने नोटा का बटन दबाया।
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मीडिया सेंटर के बाहर लगा पुलिस का जमावड़ा
बागेश्वर। विधानसभा चुनाव की मतगणना के लिए बनाए गए मीडिया सेंटर में मीडिया कर्मियों से अधिक संख्या सरकारी कर्मचारियों की रही। मीडिया सेंटर के बाहर पुलिस का काफी जमावड़ा लगा था। जिसे लेकर कुछेक मीडिया कर्मियों ने नाराजगी भी जताई। मीडिया कर्मियों का कहना था कि उन्हें पल-पल की अपडेट जारी करनी होती है, लेकिन कर्मचारियों की मौजूदगी से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मीडिया सेंटर के आसपास भारी पुलिस बल की मौजूदगी को लेकर भी मीडिया कर्मी नाराज दिखे।
छावनी में तब्दील हुआ था डिग्री कॉलेज
बागेश्वर। मतगणना को लेकर डिग्री कॉलेज में सुरक्षा काफी कड़ी थी। प्रेक्षकों के साथ ही जिला निर्वाचन अधिकारी विनीत कुमार, एसपी अमित श्रीवास्तव पूरी स्थिति पर नजर रख रहे थे। पूरा कॉलेज परिसर छावनी में तब्दील नजर आया। मतगणना केंद्र के भीतर जाने वालों की प्रवेश द्वार के अलावा दो अन्य स्थानों पर चेकिंग की जा रही थी। मेटल डिटेेक्टर से जांच के बाद ही भीतर जाने की अनुमति मिल रही थी। कॉलेज के चप्पे-चप्पे पर बैरिकेडिंग की गई थी और भारी संख्या में पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों के जवान तैनात थे।
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बागेश्वर सीट की मतगणना में हुई देरी
बागेश्वर। विधानसभा चुनाव की मतगणना के करीब तीन बजे तक पूरा होने का अनुमान लगाया जा रहा था, हालांकि गिनती पूरा होने तक पांच बज गया। जिले की दोनों विधानसभा सीटों पर 188-188 मतदान केंद्र थे और दोनों सीटों की गिनती भी एक साथ शुरू हुई लेेकिन परिणाम के मामले में कपकोट सीट अव्वल रही। कपकोट के परिणाम जहां चार बजे से पहले ही निकल गए, वहीं बागेश्वर सीट के परिणाम एक घंटे की देरी से घोषित किए गए।
कांग्रेस के प्रत्याशी सुबह से मतगणना केंद्र में दिखे
बागेश्वर। मतगणना के दौरान प्रत्याशी की मौजूदगी कम ही देखने को मिलती है लेकिन बागेश्वर सीट के मतों की गिनती शुरू होने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी मतगणना केंद्र में मौजूद थे। कुछ चरणों की गिनती तक वह मतगणना केंद्र में जमे थे, लेकिन परिणाम विपरीत जाते देखकर वह केंद्र से निकल गए।
अलग-अलग कक्षों में हुई मतों की गिनती
बागेश्वर। डिग्री कॉलेज में अमूमन मतों की गिनती का इंतजाम एक हॉल में किया जाता था, लेकिन इस बार इस परिपाटी को बदलते हुए अलग-अलग कक्षों में मतगणना हुई। कॉलेज के प्रवेश द्वार से आगे जाकर बागेश्वर सीट का मतगणना केंद्र बना था तो कॉलेज के अंतिम छोर पर मीडिया सेंटर के समीप कपकोट सीट का मतगणना केंद्र बनाया गया था।
जीत के बाद दिखी सत्ता की धमक
बागेश्वर। सत्ता की धमक क्या होती है, यह भाजपाई अक्सर दिखाते रहे हैं। परिणाम निकलने के बाद भी यह धमक देखने को मिली। विजयी प्रत्याशी जुलूस के साथ मतगणना केंद्र में पहुंचे। वाहनों का काफिला भी मतगणना स्थल के बाहर तक काफिले के रूप में घुसा। पुलिस, प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी मूकदर्शक बनकर भाजपाइयों की धमक देखते रहे। मतगणनास्थल पर बागेश्वर सीट के आरओ हर गिरि, कपकोट सीट के आरओ पारितोष वर्मा ने विजयी प्रत्याशियों को जीत का प्रमाणपत्र प्रदान किया।
भाजपाइयों ने निकाला विजय जुलूस
बागेश्वर। परिणाम निकलने के बाद बागेश्वर और कपकोट सीट के विजयी प्रत्याशियों ने समर्थकों के साथ जुलूस निकाला। खूब अबीर गुलाल उड़ाया। पटाखे फोड़े। चप्पा-चप्पा भाजपा, हर-हर मोदी-घर-घर मोदी के नारे लगे। कपकोट के भाजपा प्रत्याशी सुरेश गढ़िया ने बागेश्वर से कपकोट तक समर्थकों के साथ वैहन रैली निकाली। बागेश्वर के विजयी प्रत्याशी चंदन राम दास के समर्थकों ने मतगणनास्थल तक और फिर विधायक के कांडा रोड स्थित आवास तक विजय जुलूस निकाला।
भाजपा कार्यालय में रंगत, कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा
बागेश्वर। मतगणना के बाद रुझान आते ही भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं का पहुंचने का सिलसिला प्रारंभ हो गया। कार्यालय नेताओं और कार्यकर्ताओं से गुलजार रहा। वहीं कांग्रेस कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। कार्यालय में पार्टी जिलाध्यक्ष लोकमणि पाठक के साथ कुछ कार्यकर्ता बैठे हुए थे। उनके चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी।
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