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रेललाइन को तो कांग्रेस दे गई थी मंजूरी, बजट अवमुक्त करे मोदी सरकार

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बागेश्वर में पत्रकारों से वार्ता करते राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा है कि रेल लाइन को राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर यूपीए की सरकार ने मंजूरी दे दी थी। मोदी सरकार इस मुद्दे पर ईमानदार है तो सर्वे के नाम पर लोगों को गुमराह करना छोड़ रेल लाइन के लिए बजट अवमुक्त करके दिखाए। राज्यसभा सदस्य ने फिजूलखर्ची को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा है।
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बागेश्वर में पत्रकारों से बातचीत में राज्यसभा सदस्य टम्टा ने कहा कि यूपीए की सरकार ने वर्ष 2007 में टनकपुर-बागेश्वर रेललाइन को राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में शामिल कर मंजूरी दे दी थी। इस रेललाइन का निर्माण सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसी के साथ यूपीए सरकार ने पंचेश्वर-जौलजीबी रेल लाइन की सर्वे को भी मंजूरी दी थी। इन लाइनों के बनने से चीन और नेपाल सीमा रेल लाइनों से जुड़ जाती। सर्वे रिपोर्ट रेलवे बोर्ड को भेजने की बात कहकर जनता को भरमाया जा रहा है।
सांसद टम्टा ने आर्थिक मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि आर्थिक संकट कहकर कोरोना काल में कर्मचारी, यहां तक कि डॉक्टरों तक का वेतन काटा जा रहा है। प्रधानमंत्री के लिए आठ हजार करोड़ का विमान खरीदा गया है। 1.108 लाख करोड़ लागत की बुलेट ट्रेन चलाई जा रही है। नया संसद भवन बनाया जा रहा है, जो गैर जरूरी है। वार्ता में पूर्व जिपं अध्यक्ष हरीश ऐठानी, कांग्रेस नेता राजेंद्र टंगड़िया, धीरज कोरंगा, रंजीत दास, अंकित उपाध्याय, गोकुल परिहार आदि मौजूद थे।
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बागियों की वापसी मंजूर नहीं
बागेश्वर। राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा ने बागियों की पार्टी में वापसी के सवाल पर कहा कि जिन लोगों ने भाजपा के साथ मिलकर कांग्रेस की सरकार को गिराने का काम किया, उनकी वापसी के हक में कोई भी कार्यकर्ता नहीं है। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह को सलाह देते हुए कहा कि यह समय एकजुट होकर भाजपा पर हमला करने का है। 70 में से 11 सीट गिनाने का नहीं। कहा कि ऐसे तो फिर पांच लोकसभा सीटों में से शून्य सीट भी मुद्दा बनेगा। उन्होंने आप को भाजपा की बी टीम बताया।
राज्यसभा सदस्य के सामने उठाया पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा
बागेश्वर। पुरानी पेंशन बहाली संयुक्त मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों ने राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा के सामने पुरानी पेंशन बहाली का मुद्दा उठाया। कहा कि पेंशन की व्यवस्था समाप्त होने से शिक्षक और कर्मचारी परेशान हैं।
संयुक्त मोर्चे के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य आलोक पांडे, राष्ट्रीय प्रेस सचिव मिलिंद बिष्ट ने राज्यसभा सदस्य को सौंपे ज्ञापन में कहा कि नई पेंशन योजना में सेवानिवृत्त होने के बाद प्राप्त धनराशि गुजारे लायक भी नहीं है। सेवाकाल में मृत्यु होने पर मिलने वाली पारिवारिक पेंशन भी कम है। पुरानी पेंशन योजना में जीपीएफ से कर्मचारी को ऋण लेने की छूट थी, जो नई पेंशन योजना में नहीं है। मोर्चे के पदाधिकारियों ने कहा कि देश की संसद में पहुंचने वाले नेतागण कर्मचारियों की पुरानी पेंशन की बात करने से तक झिझक रहे हैं। भविष्य के लिहाज से प्रत्येक सरकारी कर्मचारी इस योजना में स्वयं को ठगा महसूस कर रहा है। इससे कर्मचारियों में भी अत्यंत रोष है। राज्यसभा सदस्य टम्टा ने कहा कि कांग्रेस पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर कर्मचारियों के साथ है। सरकार देश को निजीकरण की ओर धकेल रही है। वैश्विक आपदा के समय में कर्मचारियों ने प्रथम पंक्ति में डट कर अपनी क्षमता को सिद्ध किया है। उनकी सामाजिक सुरक्षा के लिए सरकार को भी आगे आना चाहिए। कहा कि वह इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाएंगे। संवाद
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